नई दिल्ली : भारत सरकार के कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (MSDE) ने 2026 के लिए देश के स्किलिंग रोडमैप को अंतिम रूप देने हेतु आयोजित एक सप्ताह के 'कौशल मंथन' का सफलतापूर्वक समापन किया। इस समापन सत्र की अध्यक्षता केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री जयन्त चौधरी ने की। 23 से 31 दिसंबर 2025 तक चले इस गहन विचार-विमर्श का मुख्य उद्देश्य एक मजबूत, उत्तरदायी और परिणाम-उन्मुखी स्किलिंग इकोसिस्टम का निर्माण करना है। बैठक में आगामी वर्ष के लिए 'कौशल संकल्पों' को सुदृढ़ किया गया, जो अब राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप नीतिगत कार्रवाई और कार्यक्रम कार्यान्वयन का मार्ग प्रशस्त करेंगे।
इस मंथन के दौरान सुधारों के अगले चरण के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर सहमति बनी। इसमें विशेष रूप से आईटीआई (ITI) के लिए 'परिणाम-आधारित ग्रेडिंग तंत्र' शुरू करने की योजना है, जो संस्थानों में गुणवत्ता सुधार और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रेरित करेगी। इसके अतिरिक्त, सेक्टर स्किल काउंसिल्स (SSC) के पुनर्गठन और उनकी नियमित समीक्षा के लिए केपीआई (KPI) आवंटन पर भी चर्चा की गई। मंत्रालय का उद्देश्य सिस्टम को सरल बनाना और क्षेत्रीय स्तर पर शक्तियों का हस्तांतरण करना है, ताकि 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा मिल सके और उद्योग की बदलती मांग के अनुरूप पाठ्यक्रमों का निरंतर आधुनिकीकरण सुनिश्चित हो।
मंत्रालय ने इस दौरान 'स्कूल से कार्य' (School-to-Work) मार्ग को और अधिक सुलभ बनाने के लिए अप्रेंटिसशिप को प्राथमिक विकल्प के रूप में पुनर्स्थापित करने का संकल्प लिया। कौशल मंथन में एक 'राष्ट्रीय संघीय कौशल एवं कार्यबल रजिस्ट्री' की स्थापना और एमएसएमई (MSME) को राष्ट्रीय कौशल ढांचे में एकीकृत करने पर भी जोर दिया गया। श्री जयन्त चौधरी ने रेखांकित किया कि भविष्य के स्किलिंग इकोसिस्टम में राज्य सरकारों के साथ व्यवस्थित तालमेल और उद्योग के साथ गहरा जुड़ाव अनिवार्य है। यह रोडमैप न केवल स्कूल छोड़ने वालों बल्कि कामकाजी पेशेवरों और आजीवन शिक्षार्थियों के लिए भी निर्बाध क्रेडिट ढांचे और गतिशीलता के रास्ते खोलेगा, जिससे 2026 में भारत का कार्यबल अधिक कुशल और प्रतिस्पर्धी बनेगा।









