मध्य प्रदेश में महिलाओं को आर्थिक सहायता देने वाली लाड़ली बहना योजना को लेकर राज्य सरकार ने अब विस्तृत समीक्षा की तैयारी शुरू कर दी है. योजना के जरिए महिलाओं को मिल रहे लाभ और उसके असर का आकलन किया जाएगा. इसके लिए सरकार ने एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है, जिसे अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए एक महीने का समय दिया गया है.
सरकार सिर्फ लाड़ली बहना योजना तक सीमित नहीं रहेगी. अलग-अलग विभागों के माध्यम से संचालित अन्य जनकल्याणकारी और हितग्राही आधारित योजनाओं की भी समीक्षा की जाएगी. इसमें कृषि और किसान कल्याण से जुड़ी योजनाओं को भी शामिल किया गया है. इसके अलावा मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान के तहत भी लाड़ली बहना योजना से लाभ लेने वाली महिलाओं से फीडबैक लिया जा रहा है. धार में कलेक्टर राजीव रंजन मीना ने लाभार्थियों से बातचीत कर योजना के बारे में जानकारी ली.
3 साल पूरे होने पर अलग मूल्यांकन
मध्य प्रदेश में लाड़ली बहना योजना को शुरू हुए तीन साल पूरे हो चुके हैं. इस मौके पर अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन संस्थान की ओर से योजना का अलग से मूल्यांकन कराया जा रहा है. इसका उद्देश्य योजना से महिलाओं को हुए आर्थिक और सामाजिक लाभ का आकलन करना है.
लाड़ली बहना योजना को राज्य की प्रमुख महिला कल्याण योजनाओं में गिना जाता है. इसे प्रदेश की राजनीति में भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की बड़ी जीत के पीछे इस योजना को भी एक अहम कारण माना गया था.
हर महीने 1.25 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को राशि
लाड़ली बहना योजना के तहत मध्य प्रदेश सरकार हर महीने 1.25 करोड़ से अधिक महिलाओं के बैंक खातों में आर्थिक सहायता भेजती है. अब सरकार यह जानने की कोशिश कर रही है कि योजना का वास्तविक असर कितना हुआ है और इसका लाभ जरूरतमंद महिलाओं तक किस तरह पहुंच रहा है.
समीक्षा के लिए गठित समिति में वित्त विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग और खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के अपर मुख्य सचिव शामिल किए गए हैं. लोक निर्माण विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव भी समिति का हिस्सा होंगे. योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग को भी इसमें शामिल किया गया है.
इन योजनाओं की भी होगी समीक्षा
महिला एवं बाल विकास: लाड़ली बहना योजना, लाड़ली लक्ष्मी योजना और सक्षम आंगनवाड़ी योजना.
कृषि एवं किसान कल्याण: मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना, कृषक फसल उपार्जन सहायता योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और सिंचाई बिजली सब्सिडी.
सामाजिक सुरक्षा: मुख्यमंत्री संबल, सामाजिक सुरक्षा पेंशन और वृद्धावस्था पेंशन.
आवास, पेयजल और ऊर्जा: प्रधानमंत्री आवास योजना, जल जीवन मिशन, अटल गृह ज्योति और स्वामित्व योजना.
स्वास्थ्य: आयुष्मान भारत और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन.
शिक्षा: समग्र शिक्षा अभियान और विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाएं.
सरकार की इस कवायद का मकसद प्रमुख योजनाओं की उपयोगिता, लाभार्थियों तक पहुंच और उनके वास्तविक प्रभाव का आकलन करना है.









