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आत्मनिर्भर भारत के लिए मिलकर स्वदेशी बैटरी तकनीक विकसित करेंगे सीओईपी टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी और जेएसडब्ल्यू प्रोजेक्ट्स

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krishna kant

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आत्मनिर्भर भारत के लिए मिलकर स्वदेशी बैटरी तकनीक विकसित करेंगे सीओईपी टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी और जेएसडब्ल्यू प्रोजेक्ट्स
  • सीओईपी टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी और जेएसडब्ल्यू प्रोजेक्ट्स के बीच साझेदारी, 800 करोड़ रुपये से अधिक के संयुक्त निवेश से बनेगा बैटरी अनुसंधान एवं विकास केंद्र

मुंबई: पुणे स्थित सीओईपी टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (सीओईपी टेक) और जेएसडब्ल्यू ग्रुप की कंपनी जेएसडब्ल्यू प्रोजेक्ट्स ने आज सीओईपी टेक के चिखली रिसर्च पार्क में एडवांस्ड बैटरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इस केंद्र को भारत का पहला स्वदेशी बैटरी प्रोटोटाइपिंग और पायलट-स्केल अनुसंधान एवं विकास प्लेटफॉर्म बताया गया है। इसके जरिए पहली बार पुणे के किसी अकादमिक परिसर में लिथियम-आयन सेल तकनीक के विकास पर काम किया जाएगा।

इस साझेदारी से सीओईपी और महाराष्ट्र को भारत के बैटरी-टेक्नोलॉजी हब के रूप में विकसित करने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है। इससे बैटरी इकोसिस्टम से जुड़े 1,000 से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। यह पहल आत्मनिर्भर भारत और वर्ष 2070 तक भारत के नेट जीरो लक्ष्य की दिशा में एक कदम है। इसका उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहन, ग्रिड स्टोरेज और क्लीन एनर्जी के भविष्य को भारतीय नवाचार से जोड़ना है।

यह साझेदारी भारत के इनोवेशन इकोसिस्टम में मौजूद एक महत्वपूर्ण अंतर को दूर करने की कोशिश है, जो विश्वविद्यालयों में होने वाले शोध और उसके औद्योगिक इस्तेमाल के बीच है। एमओयू के तहत सीओईपी टेक के शिक्षक और छात्र जेएसडब्ल्यू के इंजीनियरों के साथ मिलकर वास्तविक और व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण तकनीकों पर काम करेंगे। इसके जरिए उद्योग और शिक्षा जगत के बीच ऐसा सहयोग स्थापित किया जाएगा, जिसकी बड़े स्तर पर जरूरत है।

एमओयू पर सीओईपी टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी की ओर से रजिस्ट्रार डॉ. डी.एन. सोनावणे और जेएसडब्ल्यू ग्रुप ऑफ कंपनीज की ओर से एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट नरेश लालवानी ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर कुलपति प्रो. सुनील भिरुड, निदेशक आरआईआईएल डॉ. एस.पी. महाजन, डीन प्रो. पी.ए. सडगीर, एफएसीइंजीनियरिंग के संस्थापक एवं विप्रो पारी के पूर्व सीईओ डॉ. रणजीत डेट, प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस डॉ. सारिका केलकर, ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी डॉ. अविनाश जोशी और प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस मंदार भटावदेकर मौजूद रहे।

जेएसडब्ल्यू ग्रुप ऑफ कंपनीज की ओर से अमिताभ सिंह, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट; चंद्रकांत महालिंगम, एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट; विजय चौधरी, डिप्टी जनरल मैनेजर और सुदीप सरकार, डिप्टी जनरल मैनेजर मौजूद रहे।

सीओईपी टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. सुनील भिरुड ने कहा कि इस साझेदारी से आयातित बैटरियों का मजबूत स्वदेशी विकल्प तैयार करने और भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि छात्रों को अत्याधुनिक बैटरी तकनीकों पर सीखने और काम करने का अनूठा अवसर मिलेगा। सीओईपी टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी और जेएसडब्ल्यू के बीच पहले और दूसरे चरण के सहयोग का स्तर और दायरा इसे एक महत्वपूर्ण उद्योग-अकादमिक पहल बनाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब देशभर में अगली पीढ़ी की बैटरी तकनीकों पर व्यापक शोध हो रहा है, यह साझेदारी अनुसंधान, नवाचार और तकनीक विकास को बड़े मंच पर ले जाएगी। इससे ऐसी तकनीक विकसित करने की संभावना है, जो आयातित बैटरियों पर निर्भरता कम करने और आत्मनिर्भर तथा विकसित भारत के लक्ष्य में योगदान दे सके। उन्होंने इस पहल के लिए महाराष्ट्र सरकार और सीओईपी टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सहयोग के लिए आभार जताया।

जेएसडब्ल्यू ग्रुप के चेयरमैन सज्जन जिंदल ने कहा, “सेल नया तेल है। जिस तरह तेल ने पिछली सदी को ऊर्जा दी, उसी तरह इस सदी में बैटरी सेल इलेक्ट्रिक वाहनों से लेकर ग्रिड तक को ऊर्जा देंगे। दशकों से भारत तेल के आयात पर कीमती विदेशी मुद्रा खर्च करता रहा है। इस बार हमें अत्याधुनिक कौशल और क्षमताएं विकसित कर इन सेल का निर्माण भारत में ही करना होगा। इंजीनियरिंग उत्कृष्टता की 170 साल पुरानी विरासत वाले सीओईपी टेक के साथ हमारी साझेदारी उद्योग और शिक्षा जगत को एक साथ लाएगी। इससे भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप तैयार किए गए सेल को डिजाइन, टेस्ट और वैलिडेट करने में मदद मिलेगी और भारत के क्लीन एनर्जी भविष्य को आकार देने में योगदान मिलेगा।”

जेएसडब्ल्यू ग्रुप की साझा महत्वाकांक्षा

यह पहल भारत के प्रमुख विविधीकृत औद्योगिक समूहों में शामिल जेएसडब्ल्यू ग्रुप की व्यापक योजनाओं का हिस्सा है। जेएसडब्ल्यू एनर्जी अपने रिन्यूएबल पावर कारोबार के साथ ग्रिड-स्केल बैटरी एनर्जी स्टोरेज (बीईएसएस) क्षमता का तेजी से विस्तार कर रही है, जबकि जेएसडब्ल्यू मोटर्स विभिन्न वाहन श्रेणियों में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का तेजी से विस्तार कर रही है। दोनों योजनाओं के केंद्र में बैटरी हैं और जेएसडब्ल्यू ग्रुप ने इस क्षेत्र में स्वदेशी वैल्यू चेन विकसित करने की दिशा में नेतृत्व करने की प्रतिबद्धता जताई है। टैलेंट डेवलपमेंट, अनुसंधान एवं विकास क्षमता और देश में बैटरी इकोसिस्टम का विकास समूह और भारत के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण आधार माने जा रहे हैं।

साझेदारी के बारे में

इस परियोजना को दो चरणों में विकसित किया जाएगा और इसमें कुल 800 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जाएगा। पहले चरण में सेल रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर स्थापित किया जाएगा। यहां स्वदेशी लिथियम-आयन और अन्य उन्नत केमिस्ट्री वाले सेल, जिनमें सोडियम-आयन सेल भी शामिल हैं, के डिजाइन, सिमुलेशन और प्रोटोटाइप तैयार करने पर काम होगा। दूसरे चरण में इसे सेल वैलिडेशन सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां 100 से 600 एएच क्षमता वाले सेल का उत्पादन किया जा सकेगा। केंद्र में विकसित की जाने वाली बैटरियों का प्रदर्शन दुनिया की सर्वश्रेष्ठ बैटरियों के बराबर रखने का लक्ष्य है, जबकि इन्हें भारत की जलवायु परिस्थितियों और जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जाएगा। यह सुविधा संयुक्त शोध, शोध-पत्र, परियोजनाओं और बौद्धिक संपदा (आईपी) के विकास की नींव के रूप में काम करेगी और भारत की बैटरी तकनीक को प्रयोगशाला से उद्योग तक ले जाने में मदद करेगी।

क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल

  • पायलट लाइनें गीगा-स्केल उत्पादन की सफलता के लिए महत्वपूर्ण होती हैं। केंद्र जेएसडब्ल्यू को बड़े पैमाने पर विनिर्माण में निवेश से पहले तकनीक और प्रक्रिया से जुड़े जोखिमों को कम करने में मदद करेगा।
  • यह महाराष्ट्र सरकार के चिखली रिसर्च पार्क को ऑटोमोटिव और इससे जुड़ी तकनीकों के विकास के केंद्र के रूप में विकसित करने के विजन को भी समर्थन देता है।
  • भारत की क्लीन एनर्जी व्यवस्था में मौजूद एक बड़ी संरचनात्मक चुनौती को दूर करने की दिशा में भी यह पहल महत्वपूर्ण है। वैश्विक लिथियम-आयन सप्लाई चेन के 90 प्रतिशत से अधिक हिस्से पर चीन का नियंत्रण होने के बीच देश में स्वदेशी क्षमता विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
  • इस साझेदारी से सीओईपी और महाराष्ट्र को भारत के बैटरी-टेक्नोलॉजी हब के रूप में विकसित करने और बैटरी इकोसिस्टम से जुड़े 1,000 से अधिक रोजगार के अवसर पैदा करने की क्षमता है।
  • यह आत्मनिर्भर भारत और वर्ष 2070 तक नेट जीरो के लक्ष्य की दिशा में भी एक कदम है, जो ईवी, ग्रिड स्टोरेज और क्लीन एनर्जी के भविष्य को भारतीय नवाचार से जोड़ता है।
  • भारत के प्रमुख औद्योगिक समूहों में से एक और देश के ऐतिहासिक तकनीकी संस्थानों में शामिल सीओईपी के बीच यह साझेदारी भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक लंबी यात्रा की शुरुआत के रूप में देखी जा रही है।
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