- नामदेव फिनवेस्ट ने गौर किया है कि एमएसएमई त्योहारों के समय बढ़ने वाली मांग और मौसमी नकदी-प्रवाह की ज़रूरतें पूरी करने के लिए कार्य पूंजी ऋण की व्यवस्था को प्राथमिकता दे रहे हैं।
मुंबई: भारत के सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यम (एमएसएमई) के लिए, त्योहारी मौसम बिक्री बढ़ाने और व्यवसाय का प्रदर्शन बेहतर बनाने का महत्वपूर्ण अवसर होता है, लेकिन इस मांग के लिए तैयारी अक्सर काफी पहले शुरू हो जाती है। छोटे व्यवसाय को इन्वेंट्री, आपूर्तिकर्ता को अग्रिम भुगतान करने, उत्पादन बढ़ाने या अपनी लॉजिस्टिक्स तथा काम करने वाले लोगों (मैनपावर) की तादाद बढ़ाने की ज़रूरत पड़ सकती है। परिणामस्वरूप, कार्य पूंजी अब त्योहारों से पहले की व्यवसाय योजना का आवश्यक अंग बनती जा रही है, क्योंकि उद्यमी नकदी-प्रवाह का दबाव बढ़ने से पहले ही ऋण का इंतज़ाम करना चाहते हैं।
ऋण की इस बढ़ती मांग का असर ऋण से जुड़े व्यापक माहौल पर भी दिख रहा है। आरबीआई के आंकड़ों से स्पष्ट है कि 5 सितंबर से 17 अक्टूबर 2025 के बीच बैंक ऋण में ₹4.1 लाख करोड़ की बढ़ोतरी हुई, जो साल भर पहले इसी त्योहारी मौसम में लिए गए ऋण के मुकाबले दोगुने से भी अधिक है। समय पर ऋण मिलने से एमएसएमई को मौसमी मांग के लिए तैयारी करने में मदद मिल सकती है। वे अपने व्यवसाय चक्र और उम्मीद के मुताबिक नकदी-प्रवाह के अनुरूप ऋण ले सकते हैं।
मांग भी बढ़ रही है, क्योंकि एमएसएमई इन्वेंट्री, आपूर्तिकर्ता भुगतान, उत्पादन और लॉजिस्टिक्स की अपनी ज़रूरतों को पहले ही पूरा कर त्योहारों के दौरान बढ़ने वाली उत्पादों और सेवाओं की मांग के लिए तैयारी कर रहे हैं। नामदेव फिनवेस्ट ने गौर किया है कि त्योहारों से पहले एमएसएमई द्वारा लिए जाने वाले ऋण में ~35% की बढ़ोतरी हुई है, जिससे स्पष्ट होता है कि उद्यमी त्योहारों के मौसम से पहले स्टॉक रखने और अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए पहले से योजना बनाकर कार्य पूंजी जुटाने के लिए ऋण लेने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
एमएसएमई के लिए, ऋण की उपलब्धता के साथ-साथ उसका सही समय पर मिलना भी मायने रखता है। खुदरा विक्रेता और व्यवसायियों को मांग बढ़ने से पहले इन्वेंट्री सुरक्षित करनी होती है, विनिर्माताओं को उत्पादन बढ़ाने के लिए पूंजी चाहिए होती है, और वितरकों तथा सेवा से जुड़े व्यवसाय को क्षमता और लॉजिस्टिक्स की तैयारी करनी होती है। इन ज़रूरतों की पहले से योजना बनाने से व्यवसाय को मौसमी नकदी-प्रवाह का प्रबंधन करने और त्योहारों के मौसम में बेहतर तैयारी के साथ उतरने में मदद मिलती है।
नामदेव फिनवेस्ट के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी, श्री जितेंद्र तंवर ने इस संबंध में अपनी टिप्पणी में कहा, "आम तौर पर छोटे व्यवसायों के लिए, त्योहारी मौसम ग्राहकों की खरीदारी शुरू होने से काफी पहले ही शुरू हो जाता है। उद्यमियों को इन्वेंट्री, आपूर्तिकर्ता के भुगतान और उत्पादन क्षमता की योजना पहले से बनानी पड़ती है, और इन फैसलों के साथ-साथ ऋण की योजना बनाने से सुविधा हो सकती है। जो उद्यमी पहले से तैयारी करते हैं, वे अपने रोज़मर्रा के नकदी प्रवाह पर दबाव डाले बिना इस मौसम को बेहतर तरीके से संभाल पाते हैं।
लेकिन यहां यह ध्यान रखना चाहिए कि इस ऋण से व्यावसायिक ज़रूरतों का समाधान हो, न कि उद्यमी के लिए कोई नई चुनौती खड़ी हो जाए। जब ज़रूरत स्पष्ट हो और भुगतान व्यावसायिक चक्र के अनुरूप हो, तो समय पर मिलने वाले ऋण से उद्यमियों को ठीक तरीके से तैयारी करने और मौसम का पूरा लाभ उठाने का आत्मविश्वास मिलता है। हमारा उद्देश्य है, हर व्यवसाय को समझना और सही समय पर उसका समर्थन करना।"
आज के दौर में त्योहारी अर्थव्यवस्था का विस्तार बड़े शहरों से छोटे कस्बों तक हो रहा है, ऐसे में जो उद्यमी मौसम शुरू होने से पहले ही इन्वेंट्री की व्यवस्था कर लेते हैं, आपूर्तिकर्ता को भुगतान कर देते हैं और परिचालन के लिए तैयार रहते हैं, वे मांग बढ़ने पर उसे पूरा करने के लिहाज़ से सबसे अच्छी स्थिति में होते हैं। ऎसी स्थिति में ऋणदाताओं का उद्देश्य होता है, हर उद्यमी के व्यावसायिक चक्र को समझकर समय पर, ज़िम्मेदार तरीके से ऋण प्रदान करना।









