अगर आप 45 साल की उम्र तक 1 करोड़ रुपये का निवेश फंड तैयार करना चाहते हैं, तो सिर्फ आपकी कमाई ही महत्वपूर्ण नहीं है. निवेश की शुरुआत किस उम्र में की गई, इसका असर भी आपकी मंथली SIP पर काफी पड़ता है. जितनी जल्दी निवेश शुरू किया जाता है, उतना ज्यादा समय कंपाउंडिंग को मिलता है और लक्ष्य तक पहुंचने के लिए हर महीने कम रकम लगानी पड़ती है.
म्यूचुअल फंड में Systematic Investment Plan यानी SIP इसी वजह से लंबे समय के निवेश के लिए लोकप्रिय विकल्प है. इसमें हर महीने एक निश्चित राशि निवेश की जाती है और समय के साथ मिलने वाला रिटर्न भी दोबारा निवेश होता रहता है. इससे कंपाउंडिंग का फायदा लगातार बढ़ता जाता है.
हालांकि, म्यूचुअल फंड का रिटर्न बाजार से जुड़ा होता है और इसकी कोई निश्चित गारंटी नहीं होती. सेबी रजिस्टर्ड निवेश सलाहकार डॉ. रवि सिंह के अनुमान के मुताबिक, लंबे समय में SIP से औसतन 12 फीसदी सालाना रिटर्न मानकर गणना की जा सकती है. इसी अनुमान के आधार पर समझते हैं कि अलग-अलग उम्र में शुरुआत करने पर कितना निवेश करना होगा.
25 साल की उम्र में शुरू करें SIP
यदि 25 साल की उम्र में SIP शुरू कर दी जाए और 45 साल तक निवेश जारी रखा जाए, तो आपके पास पूरे 20 साल होंगे. 12 फीसदी अनुमानित सालाना रिटर्न के आधार पर करीब 10,200 रुपये की मासिक SIP से 1 करोड़ रुपये का फंड तैयार हो सकता है.
20 साल में कुल निवेश लगभग 24.48 लाख रुपये होगा, जबकि अनुमानित रिटर्न करीब 76.42 लाख रुपये रह सकता है. यहां सबसे बड़ा फायदा निवेश को मिलने वाला लंबा समय है.
30 साल की उम्र में शुरुआत
अगर SIP 30 साल की उम्र में शुरू होती है, तो लक्ष्य के लिए सिर्फ 15 साल बचेंगे. ऐसे में मंथली निवेश बढ़कर करीब 20,500 रुपये करना होगा. 15 साल में कुल निवेश लगभग 36.90 लाख रुपये होगा और अनुमानित रिटर्न करीब 65.51 लाख रुपये हो सकता है. इससे कुल फंड लगभग 1.02 करोड़ रुपये पहुंच सकता है.
35 साल में शुरू करने पर बढ़ेगा बोझ
35 साल की उम्र में निवेश शुरू करने पर आपके पास केवल 10 साल रह जाते हैं. इस स्थिति में 1 करोड़ के लक्ष्य के लिए करीब 44,000 रुपये हर महीने SIP करनी होगी.
10 साल में आपका कुल निवेश लगभग 52.80 लाख रुपये होगा और अनुमानित रिटर्न करीब 48.41 लाख रुपये रह सकता है. यानी कुल फंड करीब 1.01 करोड़ रुपये बन सकता है.
देरी का सीधा असर SIP पर
इन आंकड़ों से साफ है कि 25 की जगह 35 साल की उम्र में निवेश शुरू करने पर मासिक SIP करीब चार गुना से ज्यादा हो जाती है. यही कंपाउंडिंग की ताकत है. समय ज्यादा होने पर छोटी रकम भी लंबे समय में बड़ा फंड बना सकती है, जबकि देर से शुरुआत करने पर उसी लक्ष्य के लिए हर महीने काफी ज्यादा पैसा लगाना पड़ता है.









