भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ सोशल मीडिया पर इन दिनों अपनी तस्वीर को 80-90 के दशक के रेट्रो लुक में बदलने का ट्रेंड तेजी से वायरल हो रहा है। फेसबुक और दूसरे प्लेटफॉर्म पर लोग AI टूल की मदद से अपनी मौजूदा तस्वीरों को पुराने जमाने की तस्वीरों में बदलकर शेयर कर रहे हैं। अपनी बदली हुई तस्वीर देखकर लोग भले ही उत्साहित हो रहे हों, लेकिन इस ट्रेंड के साथ जुड़े डेटा प्राइवेसी और साइबर सुरक्षा के सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
प्राइवेसी पॉलिसी, डेटा-हैंडलिंग नियमों पर निर्भर
जब कोई व्यक्ति किसी AI चैटबॉट या इमेज टूल पर अपनी हाई-रिजॉल्यूशन फोटो अपलोड करता है, तो सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि वह तस्वीर सिर्फ एक सामान्य फोटो नहीं होती। उसमें चेहरे की कई विशिष्ट जानकारियां मौजूद होती हैं। AI सिस्टम तस्वीर को प्रोसेस करते समय चेहरे की बनावट, आंखों, नाक, बाल, त्वचा और दूसरी दिखाई देने वाली विशेषताओं का विश्लेषण कर सकता है। हालांकि, यह जरूरी नहीं कि हर AI कंपनी इन सभी जानकारियों को स्थायी रूप से स्टोर या किसी दूसरे उद्देश्य के लिए इस्तेमाल करे,यह पूरी तरह उस प्लेटफॉर्म की प्राइवेसी पॉलिसी और डेटा-हैंडलिंग नियमों पर निर्भर करता है।
AI टूल पर फोटो अपलोड पर रखें ध्यान
सबसे बड़ा सवाल यही है कि हम अपनी तस्वीर किस AI टूल को दे रहे हैं और वह कंपनी उस तस्वीर के साथ क्या करती है। कुछ सेवाएं अपलोड की गई तस्वीरों और उनसे जुड़ी जानकारी को सेवा उपलब्ध कराने, सुरक्षा, उत्पाद सुधार या AI मॉडल के विकास जैसे उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल कर सकती हैं। इसलिए किसी भी AI टूल पर फोटो अपलोड करने से पहले उसकी प्राइवेसी पॉलिसी और यह जरूर देखना चाहिए कि आपकी तस्वीर कितने समय तक रखी जाएगी और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा सकता है।
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भविष्य में चिंता का विषय
इसके अलावा, AI को दी गई तस्वीर को इंटरनेट पर पहले से मौजूद आपकी दूसरी तस्वीरों और वीडियो के साथ जोड़कर देखने की संभावनाएं भी भविष्य में चिंता का विषय बन सकती हैं। आज इंटरनेट और सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति की अलग-अलग एंगल से कई तस्वीरें और वीडियो मौजूद होते हैं। ऐसे में अत्याधुनिक AI तकनीक चेहरे की पहचान, फेस स्वैप और डीपफेक जैसी तकनीकों को पहले से कहीं ज्यादा प्रभावी बना सकती है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर रेट्रो फोटो बनाने वाला AI टूल आपका 3D मॉडल बना रहा है, लेकिन चेहरे की डिजिटल पहचान और फोटो के दुरुपयोग का जोखिम वास्तविक है।
तस्वीर की सुंदरता पर ना जाइये!
एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि AI सेवा का इस्तेमाल करते समय प्लेटफॉर्म को कुछ तकनीकी जानकारी मिल सकती है, जैसे IP एड्रेस, डिवाइस संबंधी जानकारी और सेवा के इस्तेमाल से जुड़ा डेटा। वास्तव में कौन-सी जानकारी एकत्र की जाती है, यह हर कंपनी की नीति और आपके डिवाइस, सेटिंग्स पर निर्भर करता है। इसलिए अगली बार जब कोई AI ट्रेंड आपको अपनी तस्वीर अपलोड करने के लिए आकर्षित करे, तो सिर्फ यह मत देखिए कि तस्वीर कितनी शानदार बन रही है। यह भी सोचिए कि आप किस कंपनी को अपनी तस्वीर दे रहे हैं, वह कंपनी उस डेटा का क्या कर सकती है और उसे कितने समय तक अपने पास रखेगी।
डिजिटल प्राइवेसी पहुंच जरुरी
AI आपको 30-40 साल पीछे का चेहरा दिखा सकता है और भविष्य की उम्र का अनुमान भी लगा सकता है, लेकिन असली सवाल यह है कि आज आपने AI को अपने चेहरे के बारे में कितनी जानकारी दे दी है। ट्रेंड का हिस्सा बनने से पहले कुछ सेकंड की सावधानी आपकी डिजिटल प्राइवेसी के लिए काफी महत्वपूर्ण हो सकती है।









