नई दिल्ली/खबर डिजिटल/ भारतीय जनता पार्टी ने सितंबर महीने को लेकर संगठन स्तर पर एक बड़ी रणनीतिक कवायद शुरू कर दी है। पार्टी अध्यक्ष के साथ करीब 45 युवा नेताओं की हुई बैठक को इसी दिशा में अहम माना जा रहा है। बैठक महज औपचारिक मुलाकात तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें नेताओं के बीच खुलकर चर्चा हुई। बताया जा रहा है कि करीब 40 नेताओं ने अपनी बात रखी और पार्टी के सामने अपने सुझाव साझा किए।
पार्टी विद डिफरेंस की बात
बीजेपी की इस बैठक को पार्टी के भीतर भविष्य की राजनीतिक रणनीति तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बैठक में स्वागत भाषण या औपचारिक प्रस्तुतियों के बजाय ओपन हाउस की तरह चर्चा हुई। युवा नेताओं को अपनी बात रखने और संगठन से जुड़े मुद्दों पर सुझाव देने का अवसर दिया गया।
उम्र के हिसाब से बनेगा राजनीतिक प्लान
बैठक के बाद पार्टी के भीतर एक ऐसी रणनीति पर विचार चल रहा है, जिसमें अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों के लिए अलग राजनीतिक और संवाद कार्यक्रम तैयार किए जाएं। इसमें तत्काल जरूरतों के साथ-साथ लंबी अवधि की रणनीति पर भी काम करने की तैयारी है। फिलहाल जिन आयु वर्गों पर विचार किया जा रहा है, उनमें 5 से 15 वर्ष, 15 से 30 वर्ष, 30 से 45 वर्ष, 45 से 60 वर्ष और 60 वर्ष से अधिक उम्र के समूह शामिल हैं। पार्टी के भीतर यह राय भी सामने आ रही है कि हर वर्ग को केवल Gen Z, Gen Alpha या Millennials जैसे प्रचलित नामों से परिभाषित करने के बजाय उम्र के व्यापक समूहों को ध्यान में रखते हुए संवाद और राजनीतिक कार्यक्रम तैयार किए जाएं।
GOM की तर्ज पर काम करेगा GOL
इस पूरी कवायद में एक और दिलचस्प मॉडल सामने आया है। सरकार में जिस तरह GOM यानी Group of Ministers किसी खास विषय पर विचार करके रिपोर्ट तैयार करता है, उसी तर्ज पर पार्टी संगठन में GOL यानी Group of Leaders बनाए जाने की योजना पर काम हो रहा है। इन समूहों में अलग-अलग नेताओं को शामिल किया जाएगा। संबंधित नेता अपने-अपने आयु वर्ग और विषय से जुड़े लोगों से संवाद करेंगे, बैठकें करेंगे और उनकी प्राथमिकताओं को समझने का प्रयास करेंगे। इसके बाद समूह अपनी रिपोर्ट तैयार करके पार्टी नेतृत्व के सामने प्रस्तुत करेंगे।
17 सितंबर से पहले देना होगा प्रेजेंटेशन?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सितंबर में नेताओं को दिए गए इस टास्क का अगला चरण क्या होगा और किस समूह को कब तक अपनी रिपोर्ट या प्रेजेंटेशन नेतृत्व के सामने रखनी होगी। चर्चा है कि 17 सितंबर से पहले इस पूरी कवायद को लेकर प्रेजेंटेशन देने की तैयारी है। यही वजह है कि बीजेपी की इस आंतरिक रणनीति को लेकर राजनीतिक हलकों में उत्सुकता बढ़ गई है। साथ ही एक सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या इस संगठनात्मक कवायद का असर केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार की संभावित टाइमलाइन पर पड़ेगा? क्या मंत्रिमंडल विस्तार को एक बार फिर कुछ दिनों के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है?
आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
फिलहाल बीजेपी की ओर से इन राजनीतिक अटकलों पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन 45 युवा नेताओं की बैठक और उसके बाद उम्र आधारित राजनीतिक रणनीति पर शुरू हुई कवायद ने सितंबर की राजनीति को जरूर दिलचस्प बना दिया है।
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