मॉनसून का असर अगस्त में देश के सीमेंट बाजार पर साफ दिखाई दिया. लगातार बारिश के कारण कई क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियां प्रभावित हुईं. कहीं कंस्ट्रक्शन का काम पूरी तरह रोकना पड़ा तो कई जगहों पर इसकी रफ्तार काफी धीमी रही. इसका सीधा असर सीमेंट की खपत और मांग पर पड़ा.
हालांकि, अब सितंबर में तस्वीर बदलने की उम्मीद जताई जा रही है. बारिश में कमी आने के साथ निर्माण कार्यों में तेजी आने की संभावना है, जिससे सीमेंट की मांग को भी मजबूती मिल सकती है. इसी बीच कीमतों को लेकर भी बाजार से अहम संकेत सामने आए हैं.
कुछ बाजारों में ₹40 तक बढ़ सकते हैं दाम
ब्रोकरेज फर्म नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के चैनल चेक के मुताबिक, सितंबर में देश के कुछ प्रमुख बाजारों में सीमेंट के दाम बढ़ सकते हैं. रिपोर्ट में कुछ क्षेत्रों में कीमतों में ₹40 प्रति बोरी तक की वृद्धि की संभावना जताई गई है.
अगस्त में बेंगलुरु में सीमेंट की कीमत करीब ₹10 प्रति बोरी बढ़ी थी. हालांकि, दक्षिण भारत के अधिकांश बाजारों में दाम फिलहाल स्थिर रहे. सितंबर में दक्षिण भारत के चुनिंदा बाजारों में कीमत करीब ₹20 प्रति बोरी तक बढ़ने का अनुमान है.
मध्य भारत में सबसे ज्यादा तेजी की संभावना
उत्तर भारत में बारिश के कारण निर्माण गतिविधियां कमजोर रहने से सीमेंट की कीमतों में अगस्त के दौरान कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ. हालांकि, सितंबर में इस क्षेत्र में करीब ₹10 प्रति बोरी तक की बढ़ोतरी हो सकती है.
मध्य भारत में कीमतों को लेकर सबसे ज्यादा तेजी का अनुमान है. नुवामा के अनुसार, डीलरों को सितंबर की शुरुआत में सीमेंट के दाम ₹30 से ₹40 प्रति बोरी तक बढ़ने की उम्मीद है. दूसरी तरफ पश्चिमी भारत में फिलहाल कीमतों में किसी बड़े बदलाव के संकेत नहीं मिले हैं.
पेटकोक की बढ़ती कीमत बनी चुनौती
सीमेंट कंपनियों के सामने सिर्फ मांग ही मुद्दा नहीं है. बढ़ती इनपुट लागत भी चिंता का कारण बनी हुई है. खासतौर पर पेटकोक की कीमतों में हाल के महीनों में तेजी आई है.
नुवामा के मुताबिक, पेटकोक की कीमत मासिक आधार पर करीब 20 डॉलर प्रति टन बढ़ी है. जुलाई 2026 में यह लगभग 133 डॉलर प्रति टन थी, जो अब बढ़कर करीब 152 डॉलर प्रति टन हो गई है. ईंधन की लागत बढ़ने से कंपनियों के मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है.
सितंबर में मांग सुधरने की उम्मीद
कुल मिलाकर, मॉनसून के बाद निर्माण गतिविधियों में तेजी आने से सितंबर में सीमेंट की मांग बढ़ने की संभावना है. इससे कीमतों को भी सपोर्ट मिल सकता है. हालांकि, पेटकोक महंगा होने के कारण कंपनियों के लिए लागत और मुनाफे का संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण रह सकता है. इसी वजह से नुवामा ने सीमेंट सेक्टर पर अपना न्यूट्रल रुख बरकरार रखा है.









