दशहरा, दिवाली और छठ पूजा जैसे बड़े त्योहार नजदीक आते ही ट्रेनों में यात्रियों की भारी भीड़ उमड़ने लगती है. ट्रेन का सफर किफायती और सुविधाजनक होने की वजह से ज्यादातर लोग इसी से यात्रा करना पसंद करते हैं. परेशानी तब खड़ी होती है जब 60 दिन पहले एडवांस बुकिंग शुरू होने के बावजूद मिनटों में टिकट फुल हो जाते हैं और लंबी वेटिंग लिस्ट थमा दी जाती है. ऐसे में त्योहार के मौके पर आखिरी समय में कन्फर्म सीट पाना किसी चुनौती से कम नहीं होता. हालांकि, अगर आप कुछ स्मार्ट ट्रैवल ट्रिक्स अपनाएं तो वेटिंग लिस्ट के झंझट से बचकर आसानी से कन्फर्म सीट हासिल कर सकते हैं.
डायरेक्ट ट्रेन में सीट न मिले तो अपनाएं 'ब्रेक जर्नी' का तरीका
जब आपकी मंजिल के लिए सीधी ट्रेन में लंबी वेटिंग दिख रही हो, तो हताश होने के बजाय अपनी यात्रा को दो या तीन हिस्सों में बांट लें. रेलवे की भाषा में इसे 'ब्रेक जर्नी' कहा जाता है. मान लीजिए आपको दिल्ली से पटना जाना है और सभी सीधी ट्रेनों में सीटें पूरी तरह से फुल हैं. ऐसी स्थिति में आप पहले दिल्ली से कानपुर तक के लिए टिकट चेक करें और फिर कानपुर से पटना के लिए किसी दूसरी ट्रेन में सीट तलाशें. रूट के बड़े मध्यवर्ती स्टेशनों (Intermediate Stations) के बीच टुकड़े-टुकड़े में टिकट तलाशने से कन्फर्म सीट मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है.
स्पेशल ट्रेन, तत्काल और वैकल्पिक रूट्स भी आएंगे काम
केवल किसी एक ही ट्रेन या तय समय के भरोसे बैठे रहने के बजाय आपको इन विकल्पों पर भी लगातार नजर रखनी चाहिए:
- फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनें: त्योहारी सीजन में यात्रियों के भारी दबाव को देखते हुए रेलवे हर साल कई स्पेशल ट्रेनें (जैसे नई दिल्ली-दरभंगा स्पेशल) चलाता है. रेलवे के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल और ऐप पर इनकी घोषणा होते ही तुरंत बुकिंग कर लें.
- तत्काल कोटा बुकिंग: जो लोग महीनों पहले टिकट बुक नहीं करा पाए हैं, वे यात्रा की तारीख से ठीक एक दिन पहले तत्काल कोटे में किस्मत आजमा सकते हैं. इसमें थोड़ा अतिरिक्त शुल्क लगता है और सीटें सीमित होती हैं, लेकिन यह आखिरी वक्त का बेहतरीन जरिया है.
- समान रूट की अन्य ट्रेनें: अक्सर लोग सिर्फ सबसे मशहूर या पसंदीदा ट्रेनों में ही टिकट ढूंढते हैं, जिससे वहां वेटिंग लंबी हो जाती है. उसी रूट पर अलग-अलग समय पर चलने वाली दूसरी ट्रेनों को भी जरूर एक्सप्लोर करें, वहां आपको आसानी से सीट मिल सकती है.









