त्योहारों के इस सीजन में अगर आप घर के लिए नया टीवी, एसी, वॉशिंग मशीन या फ्रिज खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आपको थोड़ा झटका लग सकता है. इलेक्ट्रॉनिक्स और होम अप्लायंसेज बनाने वाली प्रमुख कंपनियों ने अपने सामान के दाम 3 प्रतिशत से लेकर 10 प्रतिशत तक बढ़ा दिए हैं. ऐसे में इस बार फेस्टिव खरीदारी के दौरान ग्राहकों को पहले की तुलना में ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ेंगे.
सबसे ज्यादा महंगे हुए एसी और टीवी
दामों में सबसे ज्यादा उछाल एयर कंडीशनर (AC) की कैटेगरी में देखने को मिल रहा है. डाइकिन ने अपने एसी मॉडल्स पर 8 से 10 फीसदी की सीधी बढ़ोतरी की है, जबकि ब्लू स्टार ने एसी और डीप फ्रीजर के रेट 5 से 8 फीसदी तक बढ़ा दिए हैं. इसके साथ ही हायर, एलजी और बॉश जैसी कंपनियों ने भी अपने रूम एसी के दाम करीब 5 फीसदी तक बढ़ा दिए हैं.
दूसरी तरफ, टीवी खरीदने वालों का बजट भी बिगड़ने वाला है. हायर इंडिया ने अपने एलईडी टीवी के दामों में 2-3 फीसदी की वृद्धि की है. वहीं थॉमसन, कोडक और ब्लाउपंक्ट जैसे मशहूर ब्रांड्स का संचालन करने वाली कंपनी सुपर प्लास्ट्रोनिक्स (SPPL) अक्टूबर के बाद टीवी की कीमतों में लगभग 7 फीसदी इजाफा करने की तैयारी में है. स्क्रीन साइज के हिसाब से छोटे टीवी पर 20 फीसदी और बड़े स्क्रीन वाले टीवी पर 10 फीसदी तक रेट बढ़ सकते हैं.
वॉशिंग मशीन और फ्रिज के लिए भी ढीली करनी होगी जेब
अगर आप वॉशिंग मशीन या रेफ्रिजरेटर खरीदने की सोच रहे हैं, तो इसके लिए भी ज्यादा भुगतान करना होगा. हायर ने अपनी वॉशिंग मशीन की रेंज पर 2 से 3 फीसदी की बढ़ोतरी की पुष्टि कर दी है. इसके अलावा अन्य कंपनियां भी वॉशिंग मशीन और फ्रिज के दामों में 3 से 4 फीसदी तक की बढ़ोतरी कर रही हैं. हालांकि, कुछ कंपनियों ने अभी रेट बढ़ाने का ऐलान नहीं किया है, इसलिए अलग-अलग ब्रांड्स और मॉडल्स के आधार पर कीमतें थोड़ी भिन्न हो सकती हैं.
क्यों बढ़ रही हैं अचानक कीमतें?
कंपनियों का कहना है कि तांबा, स्टील, एल्युमीनियम और कच्चे तेल से बनने वाली सामग्रियों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे उत्पाद तैयार करने की लागत में इजाफा हुआ है. इसके अलावा, पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन प्रभावित हुई है और लॉजिस्टिक्स यानी ढुलाई का खर्च बढ़ गया है. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में आई कमजोरी से भी पार्ट्स का आयात महंगा हुआ है. ब्लू स्टार के मुताबिक, पिछले साल के फेस्टिव सीजन के मुकाबले इस बार लागत करीब 15 फीसदी बढ़ी है, लेकिन जीएसटी से मिलने वाले 10 फीसदी के फायदे के कारण ग्राहकों पर इसका कुल असर लगभग 5 फीसदी ही देखने को मिलेगा.









