आगामी त्योहारी सीजन में अपने घर जाने का मन बना रहे हवाई यात्रियों के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है. केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने मंगलवार को कहा कि सरकार आने वाले त्योहारों के दौरान हवाई किराए पर किसी भी तरह की ऊपरी सीमा (प्राइस कैप) तय नहीं करने जा रही है. हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि विमानन कंपनियों को टिकटों की दरें सामान्य और वाजिब रखने की सख्त सलाह दी गई है. 'उड़ान' योजना के अगले चरण से जुड़े समझौतों पर हस्ताक्षर कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने यह बात कही.
पश्चिम एशिया संकट से बढ़े एटीएफ के दाम, एयरलाइंस का बढ़ा परिचालन खर्च
विमानन कंपनियों की मौजूदा चुनौतियों का जिक्र करते हुए उड्डयन मंत्री ने बताया कि ईंधन की बढ़ती कीमतों की वजह से एयरलाइंस की ऑपरेटिंग कॉस्ट (परिचालन लागत) में काफी इजाफा हुआ है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक संकट के कारण एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी विमान ईंधन महंगा हो गया है. हवाई सेवा संचालन के कुल बजट में ईंधन का हिस्सा करीब 40 से 43 प्रतिशत तक होता है. यही वजह है कि एटीएफ की कीमतों में थोड़ी सी भी बढ़ोतरी सीधे तौर पर हवाई टिकटों के दामों को बढ़ा देती है. मंत्री ने स्पष्ट किया कि किरायों में इस बढ़ोतरी को केवल त्योहारी सीजन की मांग से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसके पीछे वैश्विक परिस्थितियां भी जिम्मेदार हैं.
यात्रियों की सहूलियत के लिए सरकार और एयरलाइंस के बीच लगातार संवाद
सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि त्योहारी सीजन में यात्रियों को बेवजह परेशानी या अत्यधिक आर्थिक बोझ का सामना न करना पड़े. नायडू ने बताया कि मंत्रालय नियमित आधार पर एयरलाइन कंपनियों के साथ बैठकें करता रहता है. इन चर्चाओं के दौरान एयरलाइंस को साफ तौर पर कहा गया है कि वे इस महत्वपूर्ण समय में किरायों को संतुलित रखें. सरकार का प्रयास है कि जो लोग त्योहारों के मौके पर अपनों के पास जाना चाहते हैं, उन्हें हवाई सफर का उचित और न्यायसंगत लाभ मिल सके.








