नई दिल्ली/खबर डिजिटल/ जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले पुलिस की कार्रवाई को लेकर हलचल तेज हो गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता अभिजीत दीपके को हिरासत में लिया गया है। उनके साथ आशुतोष रांका और सौरव दास को भी अलग-अलग स्थानों पर ले जाने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि अभिजीत दीपके को गुरुग्राम, आशुतोष रांका को द्वारका और सौरव दास को दिल्ली में रखा गया है। हालांकि, इन स्थानों और हिरासत की परिस्थितियों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसी बीच अभिजीत दीपके की दादी के निधन की खबर भी सामने आई है। प्रदर्शन से पहले हुई इन घटनाओं के बाद जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था और संभावित भीड़ को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
दस सदस्यों वाले संगठन पर कार्रवाई का दावा
CJP को लेकर किए जा रहे दावों में कहा जा रहा है कि यह संगठन करीब दस लोगों का है और उसके सभी सदस्यों को हिरासत में ले लिया गया है। हालांकि, संगठन के सदस्यों की संख्या और सभी लोगों की हिरासत की स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
पिछले प्रदर्शन में कई संगठनों का मिला था समर्थन
राजनीतिक विश्लेषण के तौर पर यह दावा भी किया जा रहा है कि पिछले प्रदर्शन के दौरान CJP को चंद्रशेखर आजाद, वामपंथी संगठनों, आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल से जुड़े लोगों का समर्थन मिला था। 20 जुलाई को जुटी भीड़ के पीछे भी इन संगठनों की भूमिका बताई जा रही है। इस बार राजनीतिक दलों के रुख को लेकर अलग-अलग अटकलें लगाई जा रही हैं। चर्चा है कि यदि अभिजीत दीपके या सौरव दास को अधिक राजनीतिक पहचान मिलती है, तो इससे दूसरे दलों के नेताओं के सामने भी चुनौती पैदा हो सकती है। हालांकि, इन दावों के समर्थन में संबंधित दलों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने आने की जानकारी नहीं है।
रील और सोशल मीडिया कंटेंट बनाने वालों पर भी नजर
जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शनों के स्वरूप को लेकर एक और मुद्दा उठाया जा रहा है। आरोप है कि प्रदर्शन स्थल पर राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों के अलावा सोशल मीडिया रील बनाने वाले लोगों की भी बड़ी संख्या जुटने लगी है। कुछ अनुमानों में दावा किया गया है कि वहां आने वाली भीड़ का बड़ा हिस्सा यूट्यूब और इंस्टाग्राम के लिए वीडियो बनाने वालों का होता है। इसी आधार पर यह भी कहा जा रहा है कि पुलिस इस बार ऐसे लोगों पर सख्ती कर रही है, जो प्रदर्शन के दौरान वीडियो बनाने या सोशल मीडिया कंटेंट तैयार करने के लिए पहुंचते हैं। हालांकि, इस संबंध में पुलिस की ओर से जारी किसी आधिकारिक आदेश या आंकड़े की पुष्टि नहीं हुई है।
यूट्यूबर्स की कमाई को लेकर भी चर्चा
प्रदर्शन से जुड़े सोशल मीडिया कंटेंट की कमाई को लेकर भी कई दावे सामने आए हैं। कहा जा रहा है कि जुलाई में जंतर-मंतर से वीडियो बनाने वाले करीब 20 यूट्यूबर्स ने कथित तौर पर 10 से 15 लाख रुपये तक कमाए थे। दावा है कि अगस्त और सितंबर में कमाई घटने के बाद कुछ लोग अक्टूबर में दोबारा वीडियो बनाने के उद्देश्य से यहां पहुंच रहे हैं। इन दावों में विदेशी कंटेंट क्रिएटर्स का भी उल्लेख किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि विदेश में रहकर वीडियो बनाने वाले कुछ लोग भी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर कंटेंट तैयार करना चाहते थे। हालांकि, संबंधित व्यक्तियों की पहचान, कमाई के आंकड़ों और पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
प्रदर्शन के नाम पर दबाव बनाने वालों पर सख्ती के संकेत
पूरे घटनाक्रम के बीच सरकार की नीति को लेकर यह दावा किया जा रहा है कि विरोध प्रदर्शन के नाम पर कथित तौर पर दबाव बनाने या ब्लैकमेल करने की गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल, जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले पुलिस की कार्रवाई, CJP के सदस्यों की स्थिति और सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स पर सख्ती को लेकर कई सवाल बने हुए हैं। इन मामलों में पुलिस और संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।









