नई दिल्ली/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल
बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर लगातार विचार विमर्श का दौर जारी है। हालिया दौर की बात करें तो ओबीसी और ब्राह्मण चेहरे पर विचार किया जा रहा है। बिहार चुनाव के बाद इसकी घोषणा हो जाएगी।
ब्राह्मण चेहरे पर आकर टिकी नजर
बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष किसी ब्राह्मण को बनाए जाने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। पहले कहा जा रहा था कि ओबीसी वर्ग से पार्टी का नया अध्यक्ष होगा, लेकिन प्रधानमंत्री की कुर्सी पर ओबीसी को मौका देने के बाद अब राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए ब्राह्मण चेहरे को फाइनल करने की बात कही जा रही है। यूपी बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष को लेकर कहा जा रहा है कि ओबीसी नेता को कमान दी जाएगी। सूत्रों का कहना है कि पार्टी इसकी घोषणा बिहार चुनाव के बाद ही करेगी।
बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व कर रहा मंथन
पार्टी के सूत्रों के अनुसार बीजेपी में दिल्ली, हरियाणा, कर्नाटक और त्रिपुरा के प्रदेश अध्यक्षों को लेकर मंथन का दौर जारी है। जबकि, यूपी को लेकर कहा जा रहा है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष से पहले यहां के प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा हो जाएगी। शीर्ष स्तर पर ब्राह्मण को मौका मिलने की स्थिति में यूपी का प्रदेश अध्यक्ष ओबीसी वर्ग से बनाया जा सकता है। वहीं यूपी में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं, उसको ध्यान में रखकर ही अगला नेता चुना जाएगा। इसी के साथ सीएम योगी की कैबिनेट में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
उम्र, संगठन क्षमता का पैमाना भी होगा खास
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूपी के यूपी का प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव में पार्टी का शीर्ष नेतृत्व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ( RSS) को भी विश्वास में लेगा। संघ परिवार में इन दोनों पदों के लिए व्यापक मंथन हो चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक इन चर्चाओं में हाल में नियुक्त दो चुनाव प्रभारियों और एक पूर्व मुख्यमंत्री का नाम आगे बताया जा रहा है। हालांकि दक्षिण भारत के एक केंद्रीय मंत्री ने खुद को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की रेस से बाहर कर लिया है। वहीं अंदरखानों से निकलकर आ रहा है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए 60 साल की उम्र का पैमाना भी तय किया गया है। मतलब, अनुभव के साथ-साथ ऊर्जा को अहमियत दी जाएगी।
RSS की पसंद को तरजीह
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव को लेकर काफी सतर्क रहता है। पिछली बार के समान इस बार भी संघ की पूरी नजर रहेगी कि बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन हो। सरकार में दखल नहीं देने की रणनीति के बाद संगठन को संघ अपना हिस्सा मानता है। इसीलिये एक सक्षम संगठक पर आरएसएस का जोर रहेगा। जोकि आगामी वक्त में बीजेपी को मिलने वाली चुनौतियों को बखूबी ढंग से सफलता में बदल दे।
ओबीसी और ब्राह्मण चेहरे पर दांव!
यूपी में मुख्यमंत्री के तौर पर योगी क्षत्रीय वर्ग से आते हैं। ऐसे में यूपी के प्रदेश अध्यक्ष के रुप में ओबीसी वर्ग के नेता को तरजीह मिल सकती है। ताकि आने वाले विधानसभा चुनाव में इस वर्ग को रिझाया जाए। यूपी में इस वर्ग की सबसे ज्यादा संख्या है और सपा का वोट बैंक पूरी तरह से ओबीसी वर्ग पर निर्भर है। जिसका जवाब भी बीजेपी की इस रणनीति से मिल सकता है। वहीं, केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (ओबीसी) की अगुवाई में सरकार चल रही है, लिहाजा यहां एक ब्राह्मण को कमान सौंपी जा सकती है।









