नेपाल के कई इलाकों में बुधवार को हुई मूसलाधार बारिश ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है. लगातार हो रही बारिश को देखते हुए प्रशासन ने पश्चिमी जिलों में नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने और अचानक बाढ़ आने का अलर्ट जारी किया है. जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, अर्घाखांची जिले के सिमलपानी मापन केंद्र पर महज तीन घंटे के भीतर 84.4 मिमी बारिश दर्ज की गई. इसके बाद आसपास की छोटी नदियों के उफान पर आने की आशंका को देखते हुए लोगों को सतर्क किया गया है.
दार्चुला से कंचनपुर तक कई इलाके रेड जोन में, शुक्रवार तक खराब रहेगा मौसम
मौसम विभाग ने बांके और बर्दिया जिलों में भी भारी बारिश दर्ज की है. विभाग के अलर्ट के मुताबिक दार्चुला, बैतड़ी, बाजहांग, डोटी, डडेलधुरा, कैलाली और कंचनपुर समेत आसपास के इलाकों में अचानक बाढ़ (फ़्लैश फ़्लड) का भारी खतरा मंडरा रहा है. मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि शुक्रवार तक बिजली कड़कने, तेज आंधी और रुक-रुककर बारिश का सिलसिला बना रहेगा. शनिवार से ही मौसम के सामान्य होने की उम्मीद जताई जा रही है.
हालिया आपदाओं से अभी उबरा भी नहीं था नेपाल, फिर मंडराया संकट
नेपाल अभी सितंबर के आखिरी हफ्ते में आई तबाही के जख्मों से पूरी तरह उबर भी नहीं पाया था कि नई आफत आ खड़ी हुई है. राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण के आंकड़ों के मुताबिक, 24 से 27 सितंबर के बीच हुई भारी बारिश के दौरान देश भर में आपदा की 542 घटनाएं सामने आई थीं. इनमें 304 जगह भूस्खलन, 87 स्थानों पर बाढ़ और 151 घटनाएं भारी बारिश से जुड़ी हुई थीं.
पुलों और मकानों को भारी नुकसान, लाखों लोगों तक भेजे गए चेतावनी संदेश
सितंबर की इस आपदा में 27 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी, जबकि 4 लोग लापता हो गए थे और 8 लोग घायल हुए थे. इस दौरान 1,000 से ज्यादा परिवार प्रभावित हुए, 227 घर पूरी तरह तबाह हो गए और 31 पुलों को भारी नुकसान पहुंचा. खतरे को देखते हुए लगभग 9.8 लाख लोगों को मोबाइल संदेशों के जरिए चेतावनी भेजी गई और करीब 2,000 लोगों को सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाया गया. बता दें कि इससे करीब एक महीने पहले भी मध्य और उत्तरी नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने 1,500 से अधिक लोगों की जान ले ली थी और हजारों लोग लापता हो गए थे.









