नई दिल्ली/खबर डिजिटल/ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 सितंबर 2025 को 75 वर्ष के हो चुके हैं, क्योंकि उनका जन्म 17 सितंबर 1950 को हुआ है। इसलिए 17 सितंबर 2026 को वे 76 वर्ष के होंगे। जिसके चलते माना जा रहा है कि आने वाले वक्त में बीजेपी अपना नया चेहरा जनता के सामने पेश कर सकती है, क्योंकि अगले चुनावों में बीजेपी को पीएम मोदी के विकल्प की तलाश होगी। जिस तरह से वर्तमान स्तर पर पार्टी को मुंह की खानी पड़ रही है, वो भी भविष्य की संभावनाओं को तलाश रही है। जेन जी आंदोलन और उपचुनावों में भाजपा की हार ने भी पार्टी को रुख परिवर्तन की तरफ मोड़ दिया है।
मोदी के 75 के बाद क्या बने समीकरण?
1.सबसे बड़ा सवाल ‘75 साल की उम्र’ की कथित भाजपा परंपरा का था। 2014 के बाद भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी समेत अन्य नेताओं को सक्रिय सत्ता की राजनीति से अलग किए जाने को 75 वर्ष की उम्र से जोड़कर देखा गया। इसी वजह से मोदी के 75वें जन्मदिन से पहले यह सवाल उठा था कि क्या यही फार्मूला प्रधानमंत्री पर भी लागू होगा। हालांकि, 75 वर्ष की उम्र में प्रधानमंत्री पद छोड़ने का कोई संवैधानिक नियम नहीं है और भाजपा ने भी ऐसा कोई औपचारिक नियम घोषित नहीं किया है।
2. 2025 में ही ‘मोदी के बाद कौन?’ की बहस तेज हुई थी। मोदी के 75वें जन्मदिन के आसपास उत्तराधिकारी को लेकर अटकलें चलीं, लेकिन उनका पद छोड़ना नहीं हुआ। बाद में मोदी ने भी 75 की उम्र के संदर्भ में सार्वजनिक रूप से संकेत दिया कि उम्र को लेकर उनके आगे काम करने की क्षमता पर सवाल नहीं होना चाहिए। जिसके बाद से अब तक वो बीजेपी की तरफ से प्रधानमंत्री के पद पर काबिज हैं।
3. अब असली राजनीतिक समीकरण 2029 की तरफ है। अगर मोदी 2029 का लोकसभा चुनाव भाजपा/एनडीए के प्रमुख चेहरे के तौर पर लड़ते हैं, तो 2029 में उनकी उम्र करीब 78-79 वर्ष होगी। इसलिए 75 की सीमा पार करने के बाद असली सवाल उम्र नहीं, बल्कि 2029 के नेतृत्व की रणनीति बन गया है।
4. उत्तराधिकारी की चर्चा का मतलब तत्काल बदलाव नहीं। अमित शाह, योगी आदित्यनाथ, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी समेत कई नाम समय-समय पर राजनीतिक चर्चाओं में आते रहे हैं। लेकिन इनमें से किसी को मोदी का आधिकारिक उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया गया है। इसलिए अभी किसी एक नाम को तय मानना राजनीतिक रूप से जल्दबाजी होगी।
5. भाजपा के लिए मोदी का चेहरा अभी भी केंद्रीय है। मोदी की लोकप्रियता, चुनावी अपील और संगठन पर उनका प्रभाव देखते हुए भाजपा के लिए उन्हें अचानक सक्रिय राजनीति से हटाना आसान राजनीतिक फैसला नहीं होगा। 2025 में 75 पार करने के बावजूद प्रधानमंत्री पद पर उनका बने रहना इसी बात का संकेत माना गया कि उम्र की तथाकथित सीमा को मोदी के मामले में स्वतः लागू मानना सही नहीं है।
सबसे बड़ा समीकरण क्या है?
17 सितंबर 2026 अपने आप में कोई ‘उत्तराधिकार दिवस’ नहीं होगा। असली राजनीतिक खेल तीन स्तरों पर चलेगा। मोदी बनाम विपक्ष की 2029 की चुनावी रणनीति। भाजपा में अगली पीढ़ी के नेतृत्व को तैयार करने की प्रक्रिया। RSS और भाजपा के बीच भविष्य के नेतृत्व पर सहमति। यानी 75 की उम्र वाला सवाल 2025 में राजनीतिक चर्चा का विषय था, लेकिन 2026 में ज्यादा बड़ा सवाल यह है कि मोदी 2029 तक किस भूमिका में रहेंगे और उनके बाद भाजपा की कमान किसके हाथ में जाएगी। कहा जा रहा है कि पीएम मोदी के उत्तराधिकारी का चुनाव भी वो खुद कर सकते हैं। जिसमें सबसे ऊपर अमित शाह को बताया जा रहा है।









