नई दिल्ली/खबर डिजिटल/ लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने लिखा कि हमारा वोट चुराया जा रहा है, और ये हम किसी हाल में चुपचाप नहीं सहेंगे। मतदाता सूचियों में नाम काटे गए। नियम कानून तोड़े गए। और सवाल पूछने वालों पर लाठियां चली। अब जवाब देश देगा। 1 नवंबर - चलो दिल्ली। वोट बचाओ - देश बचाओ जन मार्च और महारैली। छात्र, किसान, मजदूर, महिलाएं, नौजवान और व्यापारी, जिस-जिस को लोकतंत्र की फिक्र है, वो जरुर आए।
पोस्ट से मुख्य रूप से तीन बातें आती हैं समझ
पहली बात, रैली के बड़े आयोजन होने का अनुमान है। मानना है कि दिल्ली में लोगों को केवल नेताओं के भाषण सुनने के लिए नहीं बुलाया जा रहा, बल्कि रैली के बाद भी कोई कार्यक्रम हो सकता है। दूसरी बात, मार्च को लेकर उठ रहे सवाल। राहुल गांधी की पोस्ट में ‘मार्च’ शब्द का जिक्र होने के आधार पर सवाल उठा रहे है कि रैली के बाद मार्च कहां निकलेगा और उसका रास्ता क्या होगा। चुनाव आयोग के कार्यालय, देश की संसद , मंत्रियों का घर , कोई पचास किलोमीटर दूर नहीं है । सीधा रास्ता कनॉट प्लेस की तरफ जाता है। तीसरी बात, तारीख और दिवाली से पहले आयोजन पर सवाल। रैली को लेकर सवाल ये है कि सहयोगी दलों के कुछ नेताओं की कथित आपत्तियों के बावजूद आयोजन 1 नवंबर को ही क्यों रखा गया, और इसे दिवाली से पहले कराने की क्या वजह है।
कुल मिलाकर यह जा रहा संदेश
कुल मिलाकर, इस पोस्ट के बाद 1 नवंबर की रैली के बाद मार्च निकलने, उसके संभावित रास्ते और दिवाली से पहले आयोजन की तारीख को लेकर सवाल उठाए गए हैं। लेकिन भीड़ को संसद या चुनाव आयोग की ओर ले जाने का ठोस प्रमाण इस पोस्ट में मौजूद नहीं है। बाकी पिछले दिल्ली के घटनाक्रमों को ध्यान में रखकर 1 नवंबर का राहुल गांधी की रैली के बाद क्या होगा, सबकी नजर इस पर रहेगी?








