नई दिल्ली/खबर डिजिटल/ देश में चीनी की कीमतों को लेकर चर्चा के बीच टीवी न्यूज एंकर रूबिका लियाकत के एक बयान ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने कहा कि यदि देश की करीब 130 करोड़ आबादी रोजाना अपने भोजन में एक चम्मच चीनी की मात्रा कम कर दे, तो प्रतिदिन करीब 58 लाख किलो चीनी की बचत हो सकती है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
रूबिका लियाकत के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ यूजर्स इसे सामान्य बचत और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह के तौर पर देख रहे हैं, जबकि कई लोगों ने सवाल उठाया है कि किसी जरूरी खाद्य वस्तु की कीमत बढ़ने पर उपभोक्ताओं को खपत कम करने की सलाह देना कितना उचित है।
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सोशल मीडिया पर बहस का मुख्य मुद्दा
चीनी के दाम बढ़ने के बीच रूबिका लियाकत के बयान को लेकर सोशल मीडिया पर बहस का मुख्य मुद्दा यही बन गया है कि महंगाई की स्थिति में समाधान की जिम्मेदारी आखिर किसकी होनी चाहिए। आलोचना करने वाले लोगों का कहना है कि यदि किसी आवश्यक वस्तु की कीमत लगातार बढ़ रही है तो चर्चा उसके उत्पादन, उपलब्धता, आपूर्ति व्यवस्था, आयात-निर्यात और सरकारी नीतियों पर होनी चाहिए। उनके मुताबिक, महंगाई का बोझ कम करने के बजाय लोगों को खपत घटाने की सलाह देना मूल समस्या का समाधान नहीं है।
वहीं, दूसरी ओर कुछ लोगों का तर्क है कि चीनी की खपत कम करना बचत के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिहाज से भी फायदेमंद हो सकता है। ऐसे लोग रूबिका लियाकत की बात को महंगाई के बीच संसाधनों की बचत के एक सुझाव के रूप में देख रहे हैं।
‘एक चम्मच कम’ के आंकड़े ने खींचा ध्यान
रूबिका लियाकत के बयान में सबसे ज्यादा चर्चा रोजाना एक चम्मच चीनी कम करने से बचने वाली मात्रा को लेकर हो रही है। उनके मुताबिक, यदि देश की करीब 130 करोड़ आबादी में प्रत्येक व्यक्ति एक चम्मच चीनी कम इस्तेमाल करे तो रोजाना लगभग 58 लाख किलो चीनी की बचत संभव है। इसी आंकड़े को लेकर सोशल मीडिया पर लोग अपने-अपने तर्क दे रहे हैं। कुछ लोग इसे व्यक्तिगत स्तर पर छोटी बचत का बड़ा सामूहिक उदाहरण बता रहे हैं, जबकि आलोचक इसे महंगाई के मूल कारणों से ध्यान भटकाने वाला तर्क मान रहे हैं।
असली सवाल महंगाई से राहत का
चीनी की कीमतों को लेकर शुरू हुई यह बहस केवल एक चम्मच चीनी कम करने तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में बड़ा सवाल यह है कि आवश्यक वस्तुओं की कीमत बढ़ने पर महंगाई को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी उपभोक्ताओं की होनी चाहिए या सरकार और बाजार व्यवस्था की। फिलहाल रूबिका लियाकत का बयान सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है और इसे लेकर लोगों की राय स्पष्ट रूप से बंटी हुई नजर आ रही है। एक पक्ष इसे बचत और स्वास्थ्य से जोड़कर देख रहा है, जबकि दूसरा पक्ष महंगाई के लिए नीतिगत और बाजार संबंधी समाधान की मांग कर रहा है।







