नई दिल्ली/खबर डिजिटल/ भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व को अपना इस्तीफा सौंप दिया है और निजी कारणों का हवाला देते हुए यह निर्णय लिया है। हालांकि, अब तक न तो बीजेपी और न ही शहजाद पूनावाला की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि या बयान सामने आया है। जिसको लेकर लोगों में काफी इंतजार है।
सोशल मीडिया पर बदला अपना बायो
इन अटकलों को उस समय और बल मिला जब शहजाद पूनावाला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपने प्रोफाइल बायो में बदलाव कर दिया। उन्होंने अपने परिचय से बीजेपी का उल्लेख हटा दिया है। फिलहाल उनके बायो में खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आजीवन समर्थक बताया गया है। इसी बदलाव के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। माना जा रहा है कि उनका इस्तीफा नामंजूर भी किया जा सकता है।
पूनावाला का सियासी सफर
शहजाद पूनावाला का जन्म महाराष्ट्र के पुणे में हुआ और उन्होंने वहीं से अपनी शिक्षा पूरी की। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत कांग्रेस से की थी और छात्र संगठन एनएसयूआई में भी सक्रिय भूमिका निभाई। राजनीति में आने से पहले वे पेशे से अधिवक्ता रहे। वर्ष 2017 में उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पार्टी में वंशवाद और आंतरिक लोकतंत्र की कमी का आरोप लगाया था। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। बाद में वे बीजेपी से जुड़े और राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के प्रमुख प्रवक्ताओं में शामिल हुए। टीवी डिबेट्स में उनके आक्रामक अंदाज और तथ्यों के आधार पर तर्क रखने की शैली ने उन्हें अलग पहचान दिलाई।
कांग्रेस छोड़ने पर लगाया था आरोप
शहजाद पूनावाला के भाई तहसीन पूनावाला लंबे समय से कांग्रेस समर्थक माने जाते हैं। दोनों भाइयों के राजनीतिक विचार अलग-अलग होने के कारण उनके बीच वैचारिक मतभेद कई बार सार्वजनिक रूप से भी सामने आए हैं। हालांकि, 2017 से पहले दोनों कांग्रेस के पक्ष में सक्रिय रूप से अपनी बात रखते थे। कांग्रेस छोड़ते समय शहजाद पूनावाला ने आरोप लगाया था कि पार्टी का आंतरिक चुनाव केवल औपचारिकता था और नेतृत्व पहले से तय था। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस में योग्यता से अधिक परिवारवाद को प्राथमिकता दी जाती है, जिसके कारण कई युवा नेताओं को आगे बढ़ने का अवसर नहीं मिल पाया। फिलहाल उनके कथित इस्तीफे को लेकर केवल अटकलें और मीडिया रिपोर्ट्स सामने हैं। आधिकारिक पुष्टि या विस्तृत प्रतिक्रिया आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।









