त्योहारों का सीजन आने से पहले ही आम आदमी की रसोई का बजट गड़बड़ाने लगा है। नवरात्र और दीपावली जैसे बड़े त्योहारों में घर-घर में मिठाइयां, पकवान और प्रसाद बनते हैं, जिसके कारण चीनी की मांग अचानक बहुत बढ़ जाती है। लेकिन इस बार त्योहारों की रौनक शुरू होने से पहले ही शक्कर के दामों में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है। पिछले महज तीन दिनों में ही थोक बाजार में चीनी के भाव 500 रुपए प्रति क्विंटल तक महंगे हो गए हैं। जो चीनी कुछ दिन पहले तक 5100 से 5200 रुपए प्रति क्विंटल बिक रही थी, वह अब बढ़कर 5600 से 5700 रुपए तक पहुंच गई है। बात अगर फुटकर यानी रिटेल बाजार की करें, तो आम ग्राहकों को अब एक किलो शक्कर के लिए 55 से 60 रुपए तक चुकाने पड़ रहे हैं।
त्योहरों से पहले बाजार में मची इस तेजी के पीछे कई बड़ी वजहें हैं। जानकारों का कहना है कि उत्तर प्रदेश से होने वाली शक्कर की सप्लाई पर असर पड़ा है, जिससे बाजार में पर्याप्त मात्रा में माल नहीं पहुंच पा रहा है। दूसरी तरफ, जैसे ही लोगों को लगा कि दाम और बढ़ सकते हैं, तो बाजार में खरीदारी एकदम से तेज हो गई। मांग बढ़ने और सप्लाई कमजोर होने की इस स्थिति ने कीमतों को और ज्यादा ऊपर धकेल दिया है।
सरकार की तरफ से जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए कड़े कदम भी उठाए गए हैं। कारोबारियों के लिए शक्कर रखने की स्टॉक लिमिट को 2,000 क्विंटल से घटाकर सीधा 1,000 क्विंटल कर दिया गया है। इसके बावजूद बाजार में कीमतों पर लगाम लगती नहीं दिख रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि त्योहारी सीजन में जब डिमांड और ज्यादा बढ़ेगी, तब चीनी के दामों पर काबू कैसे पाया जाएगा। अगर समय रहते सप्लाई में सुधार नहीं हुआ, तो आम लोगों की जेब पर तो बोझ बढ़ेगा ही, साथ ही मिठाई बनाने वाले कारोबारियों की लागत भी काफी बढ़ जाएगी।
इस महंगाई के पीछे सिर्फ त्योहारी मांग ही नहीं, बल्कि कुछ अन्य कारण भी जिम्मेदार बताए जा रहे हैं। कारोबारियों का मानना है कि गन्ने की फसल पर सूखे का जो असर पड़ा है और गन्ने के एक बड़े हिस्से का इस्तेमाल एथेनॉल बनाने में हो रहा है, उससे भी कीमतों पर दबाव बना हुआ है। हालांकि, मौजूदा समय में कीमतों के इस तरह अचानक बढ़ने का सबसे मुख्य कारण कमजोर सप्लाई और बढ़ती खरीदारी ही है।
थोक शक्कर कारोबारियों का कहना है कि बाजार में नया माल सीमित मात्रा में आ रहा है, इसलिए आने वाले त्योहारों के दिनों में भी राहत मिलने की उम्मीद कम ही है। वहीं, किराना कारोबार से जुड़े संघ के अधिकारियों का तो यहां तक कहना है कि फुटकर बाजार में भाव अभी 60 रुपए तक पहुंच चुके हैं और हालात ऐसे ही रहे तो जल्द ही यह 65 रुपए प्रति किलो तक भी जा सकते हैं। कुल मिलाकर कहें तो इस बार त्योहारों पर मिठास घोलने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए फिलहाल कहीं से भी राहत की खबर नहीं है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सप्लाई कब पटरी पर लौटती है और दामों की यह रफ्तार कहां जाकर रुकती है।









