देश में महंगाई का असर अब रोजमर्रा की जरूरतों के साथ त्योहारों की मिठास पर भी दिखाई देने लगा है. चीनी की कीमतों में अचानक तेज उछाल आया है और खुदरा बाजार में इसका भाव 60 से 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है. कई जगहों पर चीनी इससे भी ज्यादा कीमत में बिक रही है. ऐसे में चाय से लेकर मिठाई और त्योहारों पर बनने वाले पकवान तक, सबका खर्च बढ़ने लगा है.
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची चीनी की कीमत
चीनी के दामों में पिछले एक महीने के दौरान करीब 10 से 20 फीसदी तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. उत्तर प्रदेश में स्थिति और ज्यादा गंभीर बताई जा रही है. यहां 19 चीनी मिलों ने अपने रेट बढ़ाए हैं, जिसके बाद बाजार में चीनी की कीमत करीब 80 साल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है.
बताया जा रहा है कि पिछले एक महीने में चीनी करीब 17 रुपये प्रति किलो तक महंगी हुई है. खास बात यह है कि पिछले 15 दिनों से लगभग हर दिन इसके दाम बढ़ते जा रहे हैं. जो चीनी कुछ समय पहले 45 रुपये किलो के आसपास मिल रही थी, वही अब 60 से 65 रुपये या कई जगह इससे ज्यादा कीमत पर बिक रही है.
ग्राहकों की जेब पर सीधा असर
चीनी के बढ़ते भाव का असर आम लोगों की खरीदारी पर भी नजर आने लगा है. आगरा के बाजार में खरीदारी करने पहुंचे एक ग्राहक ने कहा कि सरकार को चीनी की कीमतों पर नियंत्रण करना चाहिए. उसके मुताबिक चीनी अब काफी महंगी हो चुकी है और इसके दाम कम होने चाहिए.
वहीं एक अन्य ग्राहक ने चाय का जिक्र करते हुए कहा कि चीनी महंगी होने से उन लोगों पर ज्यादा असर पड़ेगा जिन्हें चाय में मिठास पसंद है. उनके मुताबिक रोजमर्रा की चीज होने के कारण चीनी की कीमत बढ़ना सीधे घरेलू बजट को प्रभावित करता है.
दुकानदार से पूछने लगे रेट
गाजियाबाद के थोक बाजार में भी बढ़े हुए दामों का असर देखने को मिल रहा है. दुकानदारों के मुताबिक ग्राहक अभी भी अपनी जरूरत के हिसाब से चीनी खरीद रहे हैं, लेकिन अब खरीदारी से पहले कीमत जरूर पूछते हैं. कुछ ग्राहक रेट सुनने के बाद पहले की तुलना में कम मात्रा में चीनी खरीद रहे हैं.
क्यों बढ़ रहे चीनी के दाम?
थोक बाजार में चीनी की कीमत पिछले साल करीब 3900 रुपये प्रति क्विंटल थी, जो अब बढ़कर 5500 रुपये प्रति क्विंटल के ऑल टाइम हाई स्तर पर पहुंच गई है. इसके पीछे त्योहारी सीजन में बढ़ी मांग को एक बड़ी वजह माना जा रहा है. बाजार में उपलब्ध पुराना स्टॉक भी काफी कम बचा है.
इसके अलावा कम बारिश के कारण गन्ने के उत्पादन पर भी असर पड़ा है. उत्पादन और उपलब्ध स्टॉक पर दबाव बढ़ने के साथ कीमतों में तेजी देखी जा रही है.
सरकार ने उठाया कदम
बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने बड़े कारोबारियों और कंपनियों के चीनी स्टॉक को लेकर भी नियम सख्त किए हैं. बताया जा रहा है कि जो कारोबारी या कंपनियां महीने में 10 मीट्रिक टन से ज्यादा चीनी इस्तेमाल करती हैं, वे 15 दिनों से अधिक का स्टॉक अपने पास नहीं रख सकेंगी. इसके साथ ही सरकार चीनी के ड्यूटी फ्री इंपोर्ट के विकल्प पर भी विचार कर रही है. हालांकि, इन कदमों के बावजूद फिलहाल चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है. आने वाले त्योहारों में इसका असर मिठाइयों और घरेलू पकवानों की लागत पर भी दिखाई दे सकता है.









