डेस्क। परिवहन से जुड़े ड्राइवरों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है।कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि बस चालक ने वाहन को कंडक्टर के संकेत पर आगे बढ़ाया है, तो उसे स्वतः आपराधिक लापरवाही का दोषी नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि बिना पर्याप्त सबूत के चालक पर लापरवाही का आरोप नहीं लगाया जा सकता।
2011 के हादसे में बस चालक को मिली राहत
यह मामला 17 अप्रैल 2011 का है, जब कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम (KSRTC) की बस अधानी से मंगासुली जा रही थी। आरोप था कि मल्लैया मंदिर के पास एक यात्री बस से उतर रही थीं, तभी चालक ने बस आगे बढ़ा दी, जिससे वह गिर गईं और उनकी मौत हो गई। निचली अदालतों ने दोषी ठहराए गए चालक को अब सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। कोर्ट ने उसकी दोषसिद्धि और सजा दोनों को रद्द कर दिया।
कंडक्टर की गवाही को कोर्ट ने माना अहम
सुनवाई के दौरान कंडक्टर की गवाही को महत्वपूर्ण माना गया। कंडक्टर ने अदालत को बताया कि यात्रियों के उतरने के बाद उसने ही चालक को बस आगे बढ़ाने का संकेत दिया था।
कोर्ट ने कहा कि चालक का प्राथमिक दायित्व सड़क और वाहन संचालन पर ध्यान देना होता है। उससे यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह लगातार पीछे मुड़कर जांच करता रहे कि सभी यात्री उतर चुके हैं या नहीं।
चालक और कंडक्टर की जिम्मेदारियां अलग-अलग
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में चालक और कंडक्टर की जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से अलग होती हैं। चालक की जिम्मेदारी वाहन को सुरक्षित तरीके से चलाना है, जबकि यात्रियों को चढ़ाने-उतारने और वाहन को रोकने या आगे बढ़ाने के समन्वय की जिम्मेदारी कंडक्टर की होती है।
भविष्य के मामलों पर पड़ सकता है असर
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में सड़क हादसों से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण नजीर साबित हो सकता है। इससे दुर्घटनाओं की जांच में केवल चालक ही नहीं, बल्कि पूरी संचालन प्रक्रिया और संबंधित जिम्मेदारियों को भी ध्यान में रखा जाएगा।
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