बिना लाइसेंस के भूलकर भी न शुरू करें ये 3 बिजनेस, छोटे व्यापारियों को रखना होगा इन बातों का खास ध्यान
खुद का कोई नया कारोबार शुरू करने का सपना देखना बहुत आसान है, लेकिन धरातल पर उतरने से पहले कानूनी और सरकारी नियमों की पूरी जानकारी होना बेहद जरूरी है। कई बार लोग बिना सोचे-समझे कम निवेश के साथ दुकान, ऑनलाइन स्टोर या छोटी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट तो खोल लेते हैं, लेकिन जरूरी परमिशन न होने की वजह से उन्हें भारी कानूनी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। अगर आप भी ऐसा कोई कदम उठाने जा रहे हैं, तो इन तीन प्रमुख क्षेत्रों से जुड़े नियमों को जरूर जान लें:
1. फूड और खाद्य पदार्थों का बिजनेस
यदि आप घर से ही अचार, पापड़, नमकीन, बेकरी आइटम्स, मिठाइयां, मसाले या किसी भी तरह के खाद्य पदार्थ बनाकर बेचने की सोच रहे हैं, तो फूड सेफ्टी के नियमों को नजरअंदाज बिल्कुल न करें। भारत में खाने-पीने का सामान बेचने वाले हर कारोबारी के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) से रजिस्ट्रेशन या लाइसेंस लेना अनिवार्य है।
यह नियम सिर्फ बड़े रेस्टोरेंट और फाइव-स्टार होटल्स पर ही लागू नहीं होता, बल्कि छोटे घरेलू निर्माताओं और दुकानदारों पर भी समान रूप से लागू होता है। आपके कारोबार का दायरा कितना है, सालाना टर्नओवर कितना है और उत्पादन क्षमता क्या है—इन सभी बातों के आधार पर FSSAI का लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन तय होता है। आप इसके आधिकारिक पोर्टल के जरिए आसानी से आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा, पैकेजिंग, साफ-सफाई और क्वालिटी स्टैंडर्ड्स के नियमों का पालन करना भी उतना ही जरूरी है।
2. मेडिकल स्टोर और हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स
दवाइयों या हेल्थकेयर सेक्टर में उतरना आम बिजनेस जैसा नहीं है। केवल एक दुकान किराए पर लेकर दवाइयां लाकर रख देना काफी नहीं है। भारत में किसी भी प्रकार की दवा बेचने के लिए संबंधित राज्य के ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट से वैध ड्रग लाइसेंस लेना कानूनी रूप से अनिवार्य है। बिना लाइसेंस दवाइयां बेचने पर सीधे कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
मेडिकल स्टोर खोलने के लिए दुकान के आकार से लेकर रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट की उपलब्धता तक, कई कड़े नियमों का पालन करना पड़ता है। खुदरा (रिटेल) और थोक (होलसेल) दवा व्यापार के लिए नियम अलग-अलग होते हैं। इसके अलावा, अगर आप स्किन केयर या अन्य हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स का बिजनेस कर रहे हैं, तो उसके लिए भी संबंधित मानक पूरे करने होते हैं।
3. बच्चों के खिलौने और अन्य उत्पाद
बच्चों के इस्तेमाल की चीजें—जैसे खिलौने, बेबी फीडिंग बॉटल्स, पालना या सुरक्षा से जुड़े अन्य उपकरण बेचने से पहले यह जान लें कि हर प्रोडक्ट के लिए अलग नियम तय किए गए हैं। बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कई उत्पादों के लिए क्वालिटी और सेफ्टी स्टैंडर्ड्स अनिवार्य कर दिए हैं।
भारत में कई तरह के खिलौने 'अनिवार्य गुणवत्ता नियंत्रण आदेश' के दायरे में आते हैं। ऐसे में खिलौनों की मैन्युफैक्चरिंग या विदेशों से उनका आयात करके उन्हें बेचने वाले कारोबारियों के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के नियमों का पालन करना और BIS सर्टिफाइड होना जरूरी है। बिना इन मानकों को पूरा किए बच्चों से जुड़ा सामान बेचना आपके बिजनेस के लिए भारी पड़ सकता है।









