भारत को आज दुनिया का सबसे युवा देश माना जाता है। देश की लगभग 65 फीसदी आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है और यही युवा शक्ति भारत की सबसे बड़ी ताकत भी है। लेकिन जनसंख्या के बदलते स्वरूप को लेकर विशेषज्ञों के बीच एक नई चर्चा शुरू हो गई है। आजादी के 100 वर्ष पूरे होने तक वर्ष 2047 में भारत भी उन देशों की श्रेणी में पहुंच जाएगा जहां बुजुर्गों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। भारत एक बड़े जनसांख्यिकीय परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। वर्तमान दौर में देश में 40 वर्ष के युवाओं की संख्या लगभग 60 फीसदी है। वर्ष 2047 में इन्हीं 60 फीसदी लोगों की उम्र 60 से 65 साल हो जाएगी। जिसका सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा। देश की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च होगा । जिससे सरकार पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा।
तेजी से बढ़ रही बुजुर्गों की संख्या
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत में पिछले कुछ दशकों में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता और जीवन प्रत्याशा में वृद्धि के कारण लोगों की औसत आयु बढ़ी है। जहां 1950 के दशक में भारतीयों की औसत आयु लगभग 35 से 37 वर्ष थी, वहीं आज यह बढ़कर 70 वर्ष के आसपास पहुंच चुकी है। संयुक्त राष्ट्र और विभिन्न जनसंख्या अध्ययनों के अनुसार वर्ष 2047 तक भारत में 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की संख्या 30 करोड़ से अधिक हो सकती है। यह संख्या कई देशों की कुल आबादी से भी अधिक होगी।
घटती जन्म दर ने बढ़ाई चिंता
भारत की घटती जन्म दर ने भी चिंता बढ़ाई है । घटती जन्म दर के कारण परिवारों का आकार लगातार छोटा हो रहा है। शिक्षा, शहरीकरण, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और आर्थिक कारणों से जन्म दर में गिरावट देखी जा रही है। पहले जहां एक परिवार में चार-पांच बच्चे सामान्य बात थी, वहीं अब दो बच्चों या एक बच्चे का चलन बढ़ रहा है। इससे इतर कई युवा तो सिंगल पेरेंट्स की भूमिका में आ गए हैं। लिव इन रिलेशनशिप के कल्चर ने भी जन्म दर पर गहरा असर डाला है। कई युवा ऐसे हैं जो शादी के बंधन में बंधना नहीं चाहते। क्यों कि वे जिम्मेदारी लेने से बचने लगे हैं। बढ़ती हुई बेरोजगारी भी इसकी मुख्य वजह मानी जा रही है। जन्म दर में कमी और जीवन प्रत्याशा में वृद्धि की वजह से यही स्थिति निर्मित होने लगी है। यही कारण है कि चीन, जापान, जर्मनी और कई यूरोपीय देश दौर से गुजर रहे है। वहाँ की सरकारों ने आबादी बढ़ाने पर फोकस किया है।
सतर्क नहीं हुए तो जापान जैसी होगी भारत की स्थिति
यदि समय रहते भारत ने अपनी स्थिति को ठीक नहीं किया तो 2047 तक भारत की स्थिति भी जापान जैसी हो जाएगी। जापान को दुनिया के सबसे वृद्ध देशों में गिना जाता है, जहां बुजुर्गों की आबादी बहुत अधिक है और युवा कार्यबल लगातार कम हो रहा है। फिलहाल तो भारत की स्थिति काफी बेहतर है। भारत में बुजुर्गों की संख्या इतनी अधिक हो जाएगी कि सरकार और समाज को उनकी आवश्यकताओं पर विशेष ध्यान देना पड़ेगा। जैसे स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त खर्च, वृद्धावस्था पेंशन और सामाजिक सुरक्षा। अकेले रह रहे वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा। देश में बुजुर्गों के लिए विशेष आवास और देखभाल केंद्रों की जरूरत होगी। मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक अलगाव की समस्या बढ़ेगी।
यदि समय रहते इन मुद्दों पर सरकार ने काम नहीं किया गया तो भविष्य में बड़ी सामाजिक और आर्थिक चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।
मोहन सरकार ने भी शुरू की तैयारी
मध्यप्रदेश की मोहन सरकार ने प्रधानमंत्री के विकसित भारत 2047 के संकल्प के साथ विकसित मध्यप्रदेश का संकल्प लिया है। भविष्य में वृद्धों की बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए मोहन सरकार ने शासकीय नौकरी में 2 बच्चों की बाध्यता को समाप्त किया है। साथ ही 2 से अधिक बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। बुजुर्गों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए अभी से वृद्धजन नीति, स्वास्थ्य संरचना, पेंशन व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। यदि सही दिशा में काम किया गया तो मध्यप्रदेश को बुजुर्गों के अनुभव के साथ युवा शक्ति की ऊर्जा का लाभ मिल सकता है। तभी विकसित भारत और विकसित मध्यप्रदेश का संकल्प पूर्ण हो सकेगा।







