भोपाल। भारत सरकार का जनजातीय कार्य मंत्रालय 1 से 15 नवंबर 2026 तक देश भर में जनजातीय गौरव पखवाड़ा मना रहा है, जिसका समापन 15 नवंबर को 'धरती आबा' भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के साथ होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2021 से शुरू हुआ यह राष्ट्रीय आंदोलन अब देश के जनजातीय नायकों के योगदान और उनकी समृद्ध सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक बन चुका है।
प्रमुख राष्ट्रीय कार्यक्रम और डिजिटल पहल
इस पखवाड़े के तहत कई बड़े राष्ट्रीय कार्यक्रमों और डिजिटल पहलों की रूपरेखा तैयार की गई है:
- राष्ट्रपति भवन संवाद: 12 नवंबर को एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (EMRS) के लगभग 200 छात्र महामहिम राष्ट्रपति से संवाद करेंगे।
- साहित्य और कार्यशालाएं: 12-13 नवंबर को नई दिल्ली में राष्ट्रीय जनजातीय साहित्य महोत्सव और आईआईटी दिल्ली में एक विशेष राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन होगा।
- महिला उद्यमिता और स्वास्थ्य: 14 नवंबर को ‘रानी दुर्गावती आदिवासी महिला सम्मेलन’ में 500 महिला उद्यमियों को जोड़ा जाएगा। साथ ही, पीएम-जनमन केंद्रों के माध्यम से स्वास्थ्य-पोषण शिविर लगाए जा रहे हैं।
- पारंपरिक चिकित्सा और प्रशिक्षण: हैदराबाद में 1,500 पारंपरिक चिकित्सकों के लिए सम्मेलन और 76,963 गांवों में 1.54 लाख ‘आदि कर्मयोगी स्वयंसेवकों’ को प्रशिक्षित किया जा रहा है।
- डिजिटल लॉन्च: स्वास्थ्य डेटा के लिए 'जन-एचआईटी' पोर्टल और वन अधिकारों की प्रक्रिया को डिजिटल बनाने के लिए 'राष्ट्रीय एफआरए डिजिटल प्लेटफॉर्म' का शुभारंभ किया जाएगा।
परियोजनाएं और राज्य-स्तरीय गतिविधियां
इस अवसर पर देश भर में 300 से अधिक परियोजनाएं शुरू की जा रही हैं, जिनमें 228 का उद्घाटन और 74 का शिलान्यास शामिल है। इसमें ईटानगर में जनजातीय अनुसंधान संस्थान भवन और मिजोरम में स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त, 19 राज्यों में 160 से अधिक सांस्कृतिक उत्सव, प्रदर्शनियां और आजीविका शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। मंत्रालय ने नागरिकों से इस अभियान से जुड़ने, 'माईगव' पर क्विज में भाग लेने और सोशल मीडिया पर #JanjatiyaGauravDivas व #JJGD2026 के साथ अपनी कहानियां साझा करने की अपील की है।









