MP Promotion: मध्य प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों और मंत्रालय दरबार से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई है। मोहन सरकार द्वारा सरकारी विभागों में रुकी हुई पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारियों के बीच एक बड़ा बबंडर खड़ा हो गया है। पदोन्नति के पदों के निर्धारण में पुराने नियमों के तहत ही आरक्षित वर्ग को कथित रूप से दोहरा लाभ देने को लेकर सामान्य अनारक्षित वर्ग के अधिकारी-कर्मचारियों में आक्रोश पैदा हो गया है।
अजय कटेसरिया की बैठक
पदोन्नति नियमों के कमान को संभालने वाले अपर सचिव अजय कटेसरिया ने सोमवार को मंत्रालय में सभी विभागों के अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक की थी। बैठक में स्पष्ट किया गया कि नए नियमों के अनुसार कुल 36 प्रतिशत पद पदोन्नति के लिए पूरी तरह आरक्षित रहेंगे। यानी इन चिन्हित सीटों पर केवल अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति वर्ग के कर्मचारियों की ही ताजपोशी हो सकेगी।
पात्र नहीं, तो रहेगा पद खाली
इतना ही नही यदि किसी संवर्ग में आरक्षित श्रेणी का कोई अधिकारी नहीं मिलता है, तो वह पद खाली छोड़ दिया जाएगा, लेकिन उसे अनारक्षित वर्ग से नहीं भरा जा सकेगा। नियमों के मुताबिक अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 16 प्रतिशत सीटें आरक्षित हैं। लेकिन विवाद इस बात पर है कि अनारक्षित श्रेणी की सीटों पर भी मेरिट के आधार पर एससी-एसटी वर्ग के अधिकारी आ सकते हैं।
सामान्य वर्ग का नुकसान
अगर आरक्षित वर्ग के अधिकारी मेरिट के जरिए सामान्य कोटे की सीट पर काबिज होते हैं, तो अनारक्षित श्रेणी का एक पद कम हो जाएगा। इसी दोहरे लाभ के फॉर्मूले का सामान्य वर्ग के कर्मचारी मंत्रालय से लेकर मैदानी स्तर विरोध कर रहे हैं।
कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि इस नीति से सामान्य और पिछड़ा वर्ग के प्रतिभावान कर्मचारियों का हक मारा जा रहा है। फिलहाल, इस मामले पर सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन मंत्रालय की इस सुलगती चिंगारी ने सूबे की ब्यूरोक्रेसी में एक बड़े विरोध को जन्म दे दिया है।







