मध्यप्रदेश में कई ऐसी जगहें हैं जो अपनी अलग पहचान के लिए जानी जाती हैं. इन्हीं में से एक है मंदसौर जिले के पास स्थित भवानी मंडी रेलवे स्टेशन, जिसकी खासियत इसे देश के सबसे अनोखे रेलवे स्टेशनों में शामिल करती है. इस स्टेशन का प्लेटफॉर्म दो राज्यों, मध्यप्रदेश और राजस्थान, की सीमा में फैला हुआ है. यही वजह है कि यहां आने वाले यात्रियों को एक ही जगह खड़े होकर दोनों राज्यों का अनुभव मिलता है.
ट्रेन रुकते ही बन जाता है दिलचस्प नजारा
भवानी मंडी रेलवे स्टेशन मध्यप्रदेश के मंदसौर और राजस्थान के झालावाड़ जिले की सीमा पर बना हुआ है. जब कोई एक्सप्रेस या लंबी दूरी की ट्रेन यहां रुकती है, तो उसका आगे का हिस्सा मध्यप्रदेश में रहता है, जबकि पीछे के डिब्बे राजस्थान की सीमा में होते हैं. यह नजारा यात्रियों के लिए काफी अलग और यादगार बन जाता है. पहली बार यहां आने वाले लोग इसे देखकर हैरान रह जाते हैं.
टिकट मध्यप्रदेश से, लाइन राजस्थान में
इस स्टेशन की सबसे रोचक बात इसका टिकट काउंटर है. टिकट खिड़की मध्यप्रदेश की सीमा में बनी हुई है, जबकि टिकट लेने के लिए लगने वाली लाइन राजस्थान की तरफ पहुंच जाती है. यानी टिकट देने वाला कर्मचारी मध्यप्रदेश में बैठता है और कई यात्री राजस्थान की जमीन पर खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं. दोनों राज्यों की सीमा दिखाने के लिए स्टेशन परिसर में स्पष्ट निशान भी बनाए गए हैं. यह टिकट काउंटर सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक खुला रहता है.
सेल्फी लेने वालों की पसंदीदा जगह
स्टेशन पर लगा नाम बोर्ड भी लोगों के बीच खास आकर्षण का केंद्र है. इस बोर्ड पर एक तरफ मध्यप्रदेश और दूसरी तरफ राजस्थान लिखा हुआ है. यहां आने वाले यात्री इस अनोखे बोर्ड के साथ फोटो और सेल्फी लेना नहीं भूलते. हर दिन बड़ी संख्या में लोग सिर्फ इस खास अनुभव को कैमरे में कैद करने के लिए यहां रुकते हैं. बताया जाता है कि करीब 50 ट्रेनें इस स्टेशन पर ठहरती हैं, जिससे यहां हमेशा यात्रियों की चहल-पहल बनी रहती है.
स्वच्छता और सौहार्द की मिसाल
भवानी मंडी रेलवे स्टेशन सिर्फ अपनी भौगोलिक खासियत के लिए ही नहीं, बल्कि साफ-सफाई और दोनों राज्यों के बीच बेहतर तालमेल के लिए भी जाना जाता है. यह स्टेशन दिखाता है कि प्रशासनिक सीमाएं अलग हो सकती हैं, लेकिन सुविधाएं और आपसी सहयोग मिलकर बेहतर व्यवस्था बना सकते हैं. कोटा एयरपोर्ट से करीब 87 किलोमीटर दूर स्थित यह स्टेशन आज मध्यप्रदेश और राजस्थान दोनों के लिए एक खास पहचान बन चुका है.









