भोपालवासियों का लंबे समय से इंतजार आखिरकार खत्म हो गया. गुरुवार से शहर में ई-बस सेवा का व्यावसायिक संचालन शुरू हो गया. पहले दिन बैरागढ़ डिपो से सुबह 6 बजे दो प्रमुख रूटों पर 10 अत्याधुनिक एसी ई-बसें चलाई गईं. ये बसें रात 8 बजे तक यात्रियों की सेवा में रहीं. नई सेवा शुरू होने से लोगों को आरामदायक, सुरक्षित और किफायती सार्वजनिक परिवहन का नया विकल्प मिल गया है. हालांकि शुरुआती दिन कुछ बस स्टॉप पर ऑटो और ई-रिक्शा के अतिक्रमण के कारण बसों को निर्धारित स्थान पर रुकने में दिक्कतों का सामना भी करना पड़ा.
पहले दिन दो हजार यात्रियों ने किया सफर
भोपाल के लिए कुल 100 ई-बसों को मंजूरी मिली है, जिनमें से फिलहाल 30 बसें शहर पहुंच चुकी हैं. पहले चरण में 10 बसों को सड़कों पर उतारा गया. सुबह बैरागढ़ डिपो से निकलकर बसें चिरायु अस्पताल पहुंचीं और वहां से बोर्ड ऑफिस की ओर रवाना हुईं. शुरुआत में यात्रियों की संख्या कम रही, लेकिन दिन चढ़ने के साथ बसों में भीड़ बढ़ने लगी. खासतौर पर बोर्ड ऑफिस से कोलार और बैरागढ़ चीचली रूट पर यात्रियों की अच्छी संख्या देखने को मिली.
बीसीएलएल के अनुसार पहले ही दिन करीब दो हजार यात्रियों ने ई-बस सेवा का लाभ उठाया, जिससे लगभग 26 हजार रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ. अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे लोगों को रूट और समय की जानकारी मिलेगी, यात्रियों की संख्या में और वृद्धि होगी.
नई सेवा को लेकर लोगों में दिखा उत्साह
ई-बसों को लेकर लोगों में उत्सुकता भी देखने को मिली. कई यात्रियों को शुरुआत में यह जानकारी नहीं थी कि ये नगर निगम की नई बसें हैं. एक छात्र बस स्टॉप पर रेड बस का इंतजार कर रहा था. कंडक्टर ने उसे बताया कि यह भी नई ई-बस सेवा का हिस्सा है. जानकारी मिलने के बाद छात्र ने उसी बस से यात्रा की. इससे साफ है कि लोगों को अभी नई सेवा और उसके रूट के बारे में धीरे-धीरे जानकारी मिल रही है.
तकनीक से लैस हैं नई ई-बसें
नई ई-बसों में यात्रियों की सुविधा के लिए कई आधुनिक फीचर दिए गए हैं. प्रत्येक बस पर डिजिटल एलईडी डिस्प्ले लगाया गया है, जिससे दूर से ही रूट की जानकारी दिखाई देती है. यात्रियों को 'चलो' ऐप के जरिए बस की लाइव लोकेशन देखने की सुविधा भी मिलेगी. टिकटिंग पूरी तरह इलेक्ट्रॉनिक होगी और ईटीएम मशीन के माध्यम से टिकट जारी किए जाएंगे.
बसों में सेंसर आधारित पैसेंजर काउंटिंग सिस्टम लगाया गया है, जो चढ़ने और उतरने वाले यात्रियों की संख्या स्वतः रिकॉर्ड करेगा. किराए का भुगतान नकद के साथ-साथ यूपीआई से भी किया जा सकेगा. दिव्यांग यात्रियों के लिए हाइड्रोलिक रैंप और व्हीलचेयर के लिए अलग स्थान की व्यवस्था भी की गई है.
इन रूटों पर दौड़ रही हैं ई-बसें
फिलहाल ई-बसें चिरायु अस्पताल, बैरागढ़, लालघाटी, कलेक्ट्रेट, रॉयल मार्केट, पीरगेट, मोती मस्जिद, कमला पार्क, न्यू मार्केट और बोर्ड ऑफिस जैसे प्रमुख मार्गों पर संचालित की जा रही हैं. इसके अलावा बोर्ड ऑफिस से एक रूट रेलवे स्टेशन और कोच फैक्ट्री तक जबकि दूसरा रूट शाहपुरा, चुनाभट्टी होते हुए कोलार बैरागढ़ चीचली तक जा रहा है.
यात्रियों को मिला सस्ता और सुरक्षित विकल्प
नई ई-बस सेवा से यात्रियों का समय और पैसा दोनों बचेंगे. नियमित यात्रा करने वाले लोगों का कहना है कि पहले ई-रिक्शा पर अधिक किराया खर्च करना पड़ता था, जबकि अब कम खर्च में आरामदायक सफर संभव होगा. इसके साथ ही सड़क पर सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को भी बढ़ावा मिलेगा. शुरुआती चुनौतियों के बावजूद ई-बस सेवा को शहरवासियों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है.







