मध्य प्रदेश में भोपाल और इंदौर मेट्रो प्रोजेक्ट पर तेजी से काम चल रहा है. दोनों शहरों में मेट्रो ट्रेनों की शुरुआत हो चुकी है, हालांकि परियोजना का बड़ा हिस्सा अभी निर्माणाधीन है. इसी बीच भोपाल मेट्रो के एक हिस्से को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. राजधानी के भोपाल टॉकीज इलाके स्थित शाही कब्रिस्तान बड़ा बाग के नीचे से प्रस्तावित अंडरग्राउंड मेट्रो लाइन का मुस्लिम समुदाय लगातार विरोध कर रहा है.
मेट्रो लाइन हजारों कब्रों के नीचे से गुजरने वाली है
मामला अब कानूनी रूप ले चुका है. कमेटी इंतेजामियां औकाफ-ए-आम्मा ने मध्यप्रदेश राज्य वक्फ अधिकरण में याचिका दायर कर मेट्रो लाइन निर्माण पर रोक लगाने की मांग की है. साथ ही नारियलखेड़ा क्षेत्र की वक्फ जमीन पर किए जा रहे निर्माण को भी चुनौती दी गई है. शुक्रवार को इस मामले में वक्फ ट्रिब्यूनल में सुनवाई हुई. ट्रिब्यूनल ने भोपाल मेट्रो प्रबंधन से जवाब तलब किया है और अगली सुनवाई 14 मई को तय की गई है. विवाद की वजह यह है कि प्रस्तावित मेट्रो लाइन हजारों कब्रों के नीचे से गुजरने वाली है, जिससे लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत होने की बात कही जा रही है.
मेट्रो परियोजना से करीब एक एकड़ क्षेत्र प्रभावित
कमेटी का कहना है कि मेट्रो परियोजना से करीब एक एकड़ क्षेत्र प्रभावित हो सकता है. उनका दावा है कि इससे बड़ी संख्या में कब्रों के अस्तित्व और संरचना पर खतरा पैदा हो सकता है. विरोध कर रहे लोगों का आरोप है कि अब तक मेट्रो प्रशासन की ओर से इस हिस्से का विस्तृत नक्शा, सुरक्षा रिपोर्ट या तकनीकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, जिससे लोगों की चिंता और बढ़ गई है. विरोध केवल बड़ा बाग तक सीमित नहीं है. हमीदिया रोड स्थित मासूमा तकिया अम्मनशाह, मस्जिद नूरानी, मुल्लाशाह और अन्य पंजीकृत वक्फ कब्रिस्तानों के नीचे से भी अंडरग्राउंड मेट्रो लाइन निकालने की योजना पर सवाल उठाए गए हैं. समुदाय का कहना है कि इन स्थानों पर हजारों कब्रें मौजूद हैं और निर्माण कार्य से उनकी पवित्रता और संरचना प्रभावित हो सकती है. बीते दिनों कब्रिस्तान परिसर में बैठकर लोगों ने मेट्रो प्रोजेक्ट के खिलाफ प्रदर्शन भी किया था. अब समुदाय इस मुद्दे को कानूनी लड़ाई के जरिए आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहा है. लोगों का कहना है कि विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन धार्मिक स्थलों और कब्रिस्तानों की संवेदनशीलता का भी पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए.
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