पूर्णिया/खबर डिजिटल/अजीत रेनू / ग्राउंड रिपोर्ट/ हमारा बिहार राज्य और हम बिहारी इसलिए बदनाम होते हैं कि हमें अपने गांव-जवार में काम नहीं मिलता है तो हम फट से दूसरे राज्य में कमाने के लिए निकल जाते है। कारण क्या होता है, यही ना की दो पैसा ज्यादा मिल जायेगा, घर परिवार के लिए मदद हो जायेगा, बच्चे अच्छे स्कूल में पढ़ सकेंगे और पर्व त्यौहार पर अच्छा-अच्छा खाने और पहनने के लिए मिल जायेगा।
लेकिन सोचिये जरा, ये सब करने के बाद पता चला कि “हमारे घर का वो अहम सदस्य, जो अपनी सारी दिक्कतों को एक तरफ रखकर विपरीत परिस्थितियों में परदेश कमाने गया था, वो घर आकर या तो खतरनाक बीमारी से ग्रसित हो जायेगा या फिर मर ही जायेगा” तो क्या होगा? है न अंतरात्मा को झकझोर देने वाली यह दुखदायी घटना , और ये घटना है पूर्णिया के कसबा प्रखंड के गुरही पंचायत की।
कहाँ काम करते थे श्रमिक
जानकारी के अनुसार पूर्णिया के कसबा प्रखंड की गुरही पंचायत से लगभग 15-20 श्रमिकों को गाँव का ही एक ठेकेदार जुनेद आंध्र प्रदेश लेकर गया था । ये सभी श्रमिक आन्ध्र प्रदेश के पत्थर कटाई के एक फक्ट्री में काम करते थे, ये सभी वहाँ लम्बे समय से काम कर रहे थे । पत्थरों की कटाई से निकलने वाले धूल से बचने के लिए कंपनी वालों के तरफ से किसी भी तरह का सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराया जाता था जिसके कारण लम्बे समय से काम करने वाले इन श्रमिको के फेफड़ो में धुल जम गए और इन श्रमिको को इस बात का तनिक भी खबर नहीं था की आने वाले समय में ये काल के गाल में समां जायेंगे ।
क्या हुआ फिर इन श्रमिकों का
अरसे बाद काम से बिहार अपने गाँव लौटे इन श्रमिको में से 4 श्रमिकों की एक के बाद एक मौत हो गई , और अन्य बाकि बचे श्रमिक जीवन और मृत्यु के बीच गंभीर हालत में अस्तपताल में भर्ती है । श्रमिकों की मौत के बाद गाँव में हडकंप मच गया है ,गाँव के लोग सकते में आ गये है।
क्या कहते है मृतक एवं बीमार श्रमिकों के परिजन
मृत श्रमिक के भाई असद आलम ने बताया कि उक्त कंपनी में श्रमिकों से ओवर ड्यूटी करवाया जाता था , काम नहीं किया तो बंद कमरे में पीटा जाता था , श्रमिको को तब तक पीटा जाता था जबतक वो वापस काम करना शुरू न कर देते थे ।
क्या कहते है इलाज करने वाले चिकित्सक
इलाज करने वाले श्वास एवं छाती रोग विशेषज्ञ चिकित्सक अर्थात डॉक्टर साहब का कहना है की बिना सुरक्षा के पत्थर कटाई से निकलने वाली धूल से ये श्रमिक गंभीर बीमारी के चपेट में आ गये । ये धूल श्रमिको के फेफड़ों तथा श्वास नली में में जम जाता है, इसी कारन उनकी हालत बिगडती गयी और अभी तक 4 श्रमिको ने दम तोड़ दिया ।
इस हृदयविदारक घटना के बाद गाँव में मातम का माहौल है । पीड़ित परिवारों ने प्रशासन से मुआवजा और बीमार श्रमिकों के बेहतर इलाज की माँग की जा रही है।
हमारे एक्सपर्ट कहना है “घर का चूल्हा जलाने के लिए परदेश जाना मज़बूरी है परन्तु जान से कीमती कुछ नहीं , इसलिए ऐसे श्रमिक अपनी सुरक्षा का ध्यान पहले रखे और पैसों का बाद में सोचे”।







