डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/ Bilgada Dam in Dindori news: डिंडोरी जिले के शाहपुरा स्थित बिलगड़ा बांध इन दिनों भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनदेखी का केंद्र बना हुआ है। 'जल जीवन मिशन' के तहत जल शोधन संयंत्र (Water Treatment Plant) के लिए इन्टेकवेल का निर्माण किया जा रहा है, लेकिन इस निर्माण प्रक्रिया में सुरक्षा मानकों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है। निर्माण एजेंसी की मनमानी और नियमों के उल्लंघन ने अब एक गंभीर सुरक्षा संकट खड़ा कर दिया है।

यह समाचार "खबर डिजिटल" में 26/02 /2026 को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था। आमतौर पर किसी भी बांध या सरकारी जल संरचना के आसपास भारी मशीनरी या विस्फोटकों के उपयोग के लिए कड़े नियम होते हैं। तकनीकी मापदंडों के अनुसार, बांध के गेट और मुख्य दीवार से कम से कम 100 से 150 मीटर की परिधि में कोई भी विस्फोटक गतिविधि प्रतिबंधित होती है।
परंतु, बिलगड़ा जलाशय के पास स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है। यहाँ निर्माण एजेंसी बांध की मुख्य संरचना से मात्र 40 से 50 फीट की दूरी पर शक्तिशाली जिलेटिन रॉड्स का उपयोग कर रही है। इन विस्फोटों से उत्पन्न होने वाला कंपन बांध की कंक्रीट संरचना में सूक्ष्म दरारें पैदा कर सकता है, जो भविष्य में बांध के टूटने या लीकेज का मुख्य कारण बन सकता है।उक्त स्थल पर जल निगम की वृहद परियोजना के तहत वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण जी ए इंफ्रा प्राईवेट लिमिटेड के द्वारा किया जा रहा है ।

मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके का मुआयना कर काम रोकने के निर्देश दिए। विभागीय सूत्रों के अनुसार, कार्यपालन यंत्री ने स्पष्ट तौर पर कार्य रोकने और पत्राचार के माध्यम से जवाब तलब किया था।
इसके बावजूद, निर्माण स्थल पर कार्य बंद नहीं हुआ। बताया जा रहा है कि मौके पर मौजूद कंपनी के प्रतिनिधि और कुछ रसूखदार व्यक्ति सत्ताधारी दल के बड़े नेताओं के नाम का सहारा लेकर स्थानीय अधिकारियों पर काम जारी रखने का दबाव बना रहे हैं। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि निर्माण एजेंसी को न तो कानून का डर है और न ही प्रशासन का।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जब ब्लास्टिंग होती है, तो पत्थर और मलबे के टुकड़े काफी दूर तक उड़ते हैं। निर्माण स्थल के पास कोई सुरक्षा घेरा या चेतावनी बोर्ड भी नहीं लगाया गया है। एक बार में लगभग 300 की तादाद में जिलेटिन बिछाकर ब्लास्ट किया जा रहा है।कंपनी के कर्मचारी पुलिस को बिना कोई सूचना दिए या अनुमति लिए ही विस्फोट कर देते हैं।गौरतलब है कि इसी क्षेत्र में पहले भी इसी कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर और अन्य चार कर्मचारियों पर अवैध गतिविधियों के चलते एफआईआर दर्ज की जा चुकी है, लेकिन फिर भी नियमों का उल्लंघन बदस्तूर जारी है।
इतनी संवेदनशील जगह पर बिना किसी तकनीकी विशेषज्ञ की मौजूदगी और बिना वैध अनुमति के विस्फोटक सामग्री का उपयोग करना एक बड़े हादसे को आमंत्रण देने जैसा है।

यदि ब्लास्टिंग के कारण बांध की दीवार में दरार आती है, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?
क्या प्रशासन केवल एफआईआर और नोटिस तक ही सीमित रहेगा, या निर्माण एजेंसी पर कोई सख्त प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जाएगी ? मौके पर विस्फोट कर लगभग 40 से 50 मीटर गड्ढा इसका जीता जागता सबूत है।
बिलगड़ा बांध केवल एक सरकारी संपत्ति नहीं है, बल्कि हजारों किसानों और ग्रामीणों की जीवनरेखा है। विकास के नाम पर इस जीवनरेखा के साथ किया जा रहा यह खिलवाड़ आने वाले समय में बड़ी जनहानि और आर्थिक क्षति का कारण बन सकता है। अब क्षेत्र की जनता की नजरें जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक पर टिकी हैं कि वे इस मामले में क्या ठोस कदम उठाते हैं।









