MP Rajya Sabha Election: मध्यप्रदेश में आगामी जून माह में खाली हो रही राज्यसभा की तीन सीटों के लिए भारतीय जनता पार्टी के अंदर गोटियां बैठना शुरू हो गई हैं। बीते सोमवार सुबह नौ बजे से सीएम हाउस में शुरू हुआ बैठकों का दौर देर तक चला। इस हाई-प्रोफाइल बैठक में क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल, राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह, मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने बंद कमरे में मैराथन चर्चा की।
शिवराज और सिंधिया की वर्चुअल एंट्री
सीएम हाउस में बैठक की टेबल पर एजेंडा सेट होने से ठीक पहले एक बेहद महत्वपूर्ण घटनाक्रम हुआ। बैठक शुरू होने से पहले पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को दिल्ली से वर्चुअली इस चर्चा में शामिल किया गया। सूत्रों के अनुसार, इस वर्चुअल बैठक के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने अंचल के समीकरणों को देखते हुए कुछ मजबूत नाम प्रस्तावित किए। तो वही इन नामों पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी अपनी पूरी सहमति दे दी। दोनों कद्दावर केंद्रीय नेताओं की आपसी रजामंदी के बाद ही अंतिम सूची को सीएम हाउस की बैठक में विचार के लिए रखा गया।
3 सीटों के लिए 9 नामों का पैनल
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, मध्य प्रदेश भाजपा संगठन ने प्रत्येक सीट के लिए तीन-तीन दावेदारों का चयन करते हुए कुल 9 नामों का एक पैनल तैयार किया है। इस पैनल को अंतिम निर्णय के लिए केंद्रीय चुनाव समिति दिल्ली भेज दिया गया है, जहां से जल्द ही तीन उम्मीदवारों के नामों का आधिकारिक एलान कर दिया जाएगा।
सामान्य वर्ग की होगी वापसी!
इस बार भाजपा राज्यसभा चुनाव में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन का कार्ड खेलने जा रही है। वर्तमान में मध्य प्रदेश से राज्यसभा में कुल 11 सीटें हैं, जिनमें से 8 भाजपा और 3 कांग्रेस के पास हैं। भाजपा के मौजूदा 8 राज्यसभा सांसदों में से एक भी सामान्य वर्ग से नहीं है। इसे सुधारने के लिए इस बार जो तीन नाम फाइनल किए जाएंगे, उनमें से एक सामान्य वर्ग, एक ओबीसी और एक अनुसूचित जनजाति कोटे से होना लगभग तय है।
क्या है गणित?
जिन तीन सीटों पर चुनाव होना है, उनमें केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन की सीट खाली हो रही है। हालांकि राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उन्हें दोबारा मौका मिल सकता है, लेकिन संगठन ने बैकअप के तौर पर इस सीट के लिए भी 3 नामों का विकल्प पैनल में रखा है। वही आदिवासी चेहरा सुमेर सिंह सोलंकी का कार्यकाल भी खत्म हो रहा है। इसके अलावा तीसरी सीट कांग्रेस कोटे की है, जहां से पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सांसद हैं।
क्या बदलेगा समीकरण?
मौजूदा विधानसभा में विधायकों की संख्या बल के हिसाब से कांग्रेस की एक सीट पूरी तरह सुरक्षित दिख रही है। लेकिन राज्यसभा चुनाव के इतिहास और भाजपा की घेराबंदी को देखते हुए सियासी पंडितों का मानना है कि यदि कांग्रेस के 4 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की या पाला बदला, तो दिग्विजय सिंह की सीट का गणित गड़बड़ाने में देर नहीं लगेगी। भाजपा इस सीट पर भी अपनी पैनी नजर गड़ाए हुए है।









