भारतीय जनता पार्टी की आगामी राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं. माना जा रहा है कि पार्टी जल्द ही अपनी नई राष्ट्रीय टीम का गठन कर सकती है. इस बार मध्यप्रदेश के नेताओं की भूमिका काफी अहम मानी जा रही है और कई बड़े चेहरों को राष्ट्रीय संगठन में जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है.
पार्टी की इन दोनों समितियों को माना जा रहा है बेहद महत्वपूर्ण
सबसे ज्यादा चर्चा भाजपा की संसदीय बोर्ड और केंद्रीय चुनाव समिति को लेकर हो रही है. पार्टी की इन दोनों समितियों को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यहां शामिल नेताओं की भूमिका राष्ट्रीय स्तर पर रणनीति तय करने में अहम होती है. सूत्रों के अनुसार मध्यप्रदेश से वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय का नाम प्रमुख दावेदारों में शामिल बताया जा रहा है. अगर उन्हें इन समितियों में जगह मिलती है तो इसे राज्य के राजनीतिक प्रभाव में बड़ी बढ़ोतरी के तौर पर देखा जाएगा.
कई नाम आ रहे सामने
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद को लेकर भी कई नाम सामने आ रहे हैं. पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा और वरिष्ठ भाजपा नेता राकेश सिंह को इस पद के लिए मजबूत दावेदार माना जा रहा है. वहीं राष्ट्रीय महासचिव पद के लिए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा और कविता पाटीदार के नामों की चर्चा लगातार बनी हुई है. पार्टी इस बार महिला नेतृत्व को ज्यादा महत्व देने के संकेत दे रही है, इसलिए संभावना जताई जा रही है कि मध्यप्रदेश से किसी महिला नेता को संगठन में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है.
इनका नाम चर्चा में
राष्ट्रीय मंत्री पद के लिए अरविंद भदौरिया और गौरव तिवारी के नाम चर्चा में हैं. इसके अलावा राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर आशीष अग्रवाल और जीतू जिराती के नामों को लेकर भी राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज हैं. राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य के रूप में रामेश्वर शर्मा और भक्ति शर्मा के नामों पर भी विचार किया जा रहा है.
मध्यप्रदेश भाजपा को नया प्रभारी और सह-प्रभारी मिलने की भी संभावना
सूत्रों का कहना है कि भाजपा इस बार संगठन में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन बनाने पर विशेष ध्यान दे रही है. पार्टी अलग-अलग राज्यों और वर्गों को प्रतिनिधित्व देकर व्यापक संदेश देने की रणनीति पर काम कर रही है. इसी के तहत मध्यप्रदेश भाजपा को नया प्रभारी और सह-प्रभारी मिलने की भी संभावना जताई जा रही है. चर्चा यह भी है कि गुजरात से किसी अनुभवी नेता को यह जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है. अगर मध्यप्रदेश के नेताओं को राष्ट्रीय संगठन में बड़ी हिस्सेदारी मिलती है, तो इसका असर आने वाले चुनावों और प्रदेश की राजनीति पर साफ तौर पर दिखाई दे सकता है. भाजपा के भीतर फिलहाल नई टीम को लेकर चर्चाओं का दौर लगातार जारी है और अंतिम फैसले का इंतजार किया जा रहा है.
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