भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार को संगठन में लंबे समय से चल रहे बदलावों पर विराम लगाते हुए नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर दिया है. इस टीम में उत्तर प्रदेश के आठ नेताओं को अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं. इनमें चार नेताओं को राष्ट्रीय पदाधिकारी बनाया गया है, जबकि दो नेताओं को राष्ट्रीय मोर्चों की कमान सौंपी गई है. उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले हुए इन बदलावों को राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है.
यूपी के नेताओं को मिली अहम जिम्मेदारी
भाजपा की नई टीम में रेखा वर्मा और प्रो. तारिक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है. वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और बस्ती के पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया है. डॉ. भोला सिंह और संगीता यादव को राष्ट्रीय मंत्री की जिम्मेदारी मिली है. इसके अलावा उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद अमरपाल मौर्य को राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. संगठन में लंबे समय से सक्रिय रहे अमरपाल मौर्य को पिछड़े वर्ग के बीच भाजपा की पहुंच मजबूत करने वाला अहम चेहरा माना जाता है. उनकी नियुक्ति को पार्टी की सामाजिक रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है.
ओबीसी और मुस्लिम वोटरों पर नजर
भाजपा की नई टीम में पिछड़े वर्ग के नेताओं को प्रमुख स्थान दिए जाने को सपा के पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण की काट के तौर पर देखा जा रहा है. यूपी की राजनीति में ओबीसी वोट बैंक की अहम भूमिका को देखते हुए भाजपा का फोकस इस वर्ग के बीच अपनी पकड़ और मजबूत करने पर नजर आ रहा है. वहीं अल्पसंख्यक समुदाय तक अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए कुंवर बासित अली को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया है. बासित अली लंबे समय से उत्तर प्रदेश भाजपा में पार्टी के प्रमुख मुस्लिम चेहरों में शामिल रहे हैं. उनकी नई जिम्मेदारी को मुस्लिम समुदाय के बीच संगठन का आधार बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.
2027 चुनाव से पहले यूपी पर खास फोकस
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश के आठ नेताओं को भाजपा की राष्ट्रीय टीम में जगह मिलना अपने आप में काफी अहम है. 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी संगठन में ऐसे चेहरों को आगे बढ़ा रही है, जो अलग-अलग सामाजिक वर्गों के बीच उसकी मौजूदगी मजबूत कर सकें. भाजपा की रणनीति सिर्फ संगठन का विस्तार करने तक सीमित नहीं दिख रही है. पार्टी की कोशिश अलग-अलग जातीय और सामाजिक समूहों के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ बढ़ाने की भी है. ऐसे में नई राष्ट्रीय टीम में उत्तर प्रदेश को मिली अहम हिस्सेदारी को आने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है.









