भाजपा में अनुशासन को लेकर सख्ती बढ़ने के बीच सिंधिया समर्थक कृष्णा घाड़गे मंगलवार को पार्टी के प्रदेश कार्यालय पहुंचे. यहां उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों से मुलाकात कर अपनी बात रखी. हाल ही में सोशल मीडिया पर की गई एक विवादित पोस्ट को लेकर पार्टी ने उनके खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी किया था. इसी मामले को लेकर उन्हें प्रदेश कार्यालय बुलाया गया था.
कृष्णा घाड़गे को नोटिस
सोमवार देर रात भाजपा संगठन ने कृष्णा घाड़गे को नोटिस जारी करते हुए सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणी पर जवाब मांगा था. पार्टी का कहना था कि सार्वजनिक मंच या सोशल मीडिया पर किसी भी तरह की अनुशासनहीनता और विरोधाभासी बयानबाजी संगठन स्वीकार नहीं करेगा. भाजपा ने इस मामले को गंभीर मानते हुए इसे पार्टी विरोधी गतिविधि की श्रेणी में रखा.
भाजपा संगठन ने अपनाया सख्त रुख
दरअसल विवाद की शुरुआत उस फेसबुक पोस्ट से हुई जिसमें कृष्णा घाड़गे ने “बालक बुद्धि नेता” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था. इस पोस्ट को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई थी. माना जा रहा था कि उनका इशारा गुना के पूर्व सांसद केपी यादव की तरफ था. केपी यादव वही नेता हैं जिन्होंने पिछले लोकसभा चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया को हराया था. पोस्ट वायरल होने के बाद भाजपा संगठन ने तुरंत सख्त रुख अपनाया.
कृष्णा घाड़गे ने दी सफाई
प्रदेश कार्यालय पहुंचने के बाद कृष्णा घाड़गे ने मीडिया से बातचीत में अपनी सफाई दी. उन्होंने कहा कि उनकी पोस्ट को गलत तरीके से पेश किया गया. उनका कहना था कि उन्होंने यह टिप्पणी कांग्रेस नेता राहुल गांधी को लेकर की थी. घाड़गे ने कहा कि राहुल गांधी की कार्यशैली के कारण कांग्रेस को चुनाव में नुकसान हुआ और उसी संदर्भ में उन्होंने पोस्ट लिखी थी. उन्होंने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर वायरल किया गया, जिससे भ्रम की स्थिति बनी.
कृष्णा घाड़गे ने क्या कहा
कृष्णा घाड़गे ने यह भी कहा कि पार्टी नेतृत्व के साथ उनकी बातचीत सकारात्मक रही और अब स्थिति पूरी तरह साफ हो चुकी है. उन्होंने स्पष्ट किया कि ज्योतिरादित्य सिंधिया और केपी यादव दोनों ही उनके वरिष्ठ नेता हैं और वह संगठन की मर्यादा का पूरा सम्मान करते हैं. भाजपा संगठन इस पूरे मामले को लेकर लगातार सतर्क नजर आ रहा है. पार्टी नेतृत्व साफ संकेत दे चुका है कि सोशल मीडिया पर नेताओं की बयानबाजी पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी और अनुशासनहीनता किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी. इस घटनाक्रम के बाद प्रदेश की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है.
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