भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सीनियर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर निर्माण के लिए दिए गए चंदे को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर के लिए जुटाई गई दान राशि के इस्तेमाल में बड़ी गड़बड़ी हुई है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि वह अयोध्या की अदालत में मुकदमा दायर करेंगे और मांग करेंगे कि उनके द्वारा ट्रस्ट को दिया गया दान वापस किया जाए। उनका कहना है कि यदि अदालत अनुमति देती है तो वह यह राशि किसी अन्य धार्मिक ट्रस्ट को दान करेंगे।
राम मंदिर निर्माण के लिए दो बार दिया गया था चंदा
दिग्विजय सिंह ने कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए दो अलग-अलग चरणों में चंदा अभियान चलाया गया था। पहला अभियान लालकृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा के दौरान हुआ था, जिसमें उन्होंने भी आर्थिक सहयोग दिया था। उनका दावा है कि उस समय जुटाई गई राशि का सार्वजनिक हिसाब आज तक सामने नहीं आया।
उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जब दोबारा चंदा अभियान शुरू हुआ, तब उन्होंने विश्व हिंदू परिषद को दान देने के बजाय सीधे राम मंदिर ट्रस्ट को 1.11 लाख रुपये का योगदान दिया था। उन्होंने कहा कि इस राशि की उन्हें आधिकारिक रसीद भी मिली थी।
शिवराज सिंह से ज्यादा दान देने का किया दावा
कांग्रेस नेता ने कहा कि उस समय के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राम मंदिर निर्माण के लिए 1 लाख रुपये का दान दिया था। उन्होंने बताया कि उन्होंने श्रद्धा के भाव से 1.11 लाख रुपये का योगदान दिया, जो उस समय मुख्यमंत्री के दान से अधिक था। दिग्विजय सिंह के अनुसार उन्होंने पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर यह राशि ट्रस्ट तक पहुंचाने का आग्रह किया था, लेकिन पत्र वापस लौट आया। इसके बाद उन्होंने स्वयं ट्रस्ट में दान राशि जमा कराई।
ट्रस्ट पर लगाए अनियमितताओं के आरोप
दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों ने दान राशि के उपयोग में गंभीर अनियमितताएं की हैं। उन्होंने दावा किया कि कम वेतन पर बाहरी लोगों की नियुक्ति की गई और प्रतिदिन मिलने वाले दान का एक हिस्सा कथित रूप से गायब होता रहा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस मामले में बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित ट्रस्ट की ओर से इस बयान के समय तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
बोले- दान वापस लेकर दूसरे ट्रस्ट को दूंगा
दिग्विजय सिंह ने कहा कि वह अयोध्या की अदालत में याचिका दाखिल करेंगे और अदालत से अनुरोध करेंगे कि उनकी दान राशि उन्हें वापस दिलाई जाए। उनका कहना है कि यदि ऐसा होता है तो वह यह राशि किसी अन्य धार्मिक संस्था, जैसे शंकराचार्य मठ या रामालय ट्रस्ट, को दान करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें पुलिस जांच पर भरोसा नहीं है, इसलिए वह न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का फैसला कर रहे हैं।
महाकाल मंदिर को लेकर भी उठाए सवाल
राम मंदिर के साथ-साथ दिग्विजय सिंह ने उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से जुड़े कुछ मामलों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर से जुड़ी कुछ व्यवस्थाओं और जमीन आवंटन की जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके पास इससे जुड़े दस्तावेज मौजूद हैं और मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
2 अक्टूबर से उज्जैन से अयोध्या तक निकालेंगे पदयात्रा
दिग्विजय सिंह ने घोषणा की कि वह 2 अक्टूबर से उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा निकालेंगे। उन्होंने कहा कि यह यात्रा गैर-राजनीतिक होगी और इसमें किसी भी राजनीतिक दल का झंडा नहीं रहेगा। उनके अनुसार भगवान राम में आस्था रखने वाला कोई भी व्यक्ति इस यात्रा में शामिल हो सकेगा।
भोपाल में विरोध प्रदर्शन के दौरान भी उठाया मुद्दा
भोपाल में महिला कांग्रेस द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन और सद्बुद्धि यज्ञ कार्यक्रम में भी दिग्विजय सिंह ने इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा कि कुछ ट्रस्ट पदाधिकारियों से इस्तीफा तो मांगा गया, लेकिन उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं हुई।
उन्होंने बताया कि वह 5 या 6 जुलाई को अपने वकीलों से चर्चा करेंगे और इसके बाद अयोध्या जाकर अदालत में मुकदमा दायर करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग करेंगे।
ये खबर भी पढ़ें..









