Datia By-Election: इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया द्वारा राज्यसभा और कई राज्यों के विधानसभा उप चुनावों के लिए जारी की गई अधिसूचना ने मध्य प्रदेश की दतिया सीट पर उपचुनाव की उड़ रही तमाम अफवाहों पर फिलहाल पूरी तरह से रोक लगा दी है। पिछले कई दिनों से दतिया में उप चुनावी माहौल बनने की जो हवा तैयार की जा रही थी, चुनाव आयोग की जारी सूची में दतिया का नाम न होने से वह पूरी तरह शांत हो गई है।
सिब्बल के देरी, टली सुनवाई
दरसअल, इस पूरे मामले का बड़ा केंद्र दिल्ली हाई कोर्ट भी बना हुआ है, जहां पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की याचिका पर सुनवाई होनी थी। बीते सोमवार, 25 मई 2026 को दिल्ली उच्च न्यायालय में मामले पर सुनवाई प्रस्तावित थी। लेकिन राजेंद्र भारती की पैरवी कर रहे देश के दिग्गज और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल अदालत में देरी से पहुंचे। समय पर वकील के न पहुंचने के कारण सुनवाई नहीं की जा सकी, जिसके चलते अदालत ने मामले को आगे बढ़ा दिया। अब कोर्ट इस मामले में आगामी 14 जुलाई 2026 को अगली सुनवाई करेगा।
क्यों शून्य हुई भारती की विधायकी?
आपको बता दें कि दतिया के राजनैतिक संकट और सीट खाली होने की पूरी कहानी 27 साल पुराने एक कानूनी मामले से जुड़ी है। दतिया से कांग्रेस के कद्दावर नेता राजेंद्र भारती को एक कोर्ट ने 27 साल पुराने फिक्स डिपॉजिट हेराफेरी के मामले में दोषी करार दिया था। इस मामले में अदालत ने उन्हें 3 साल के कारावास की सजा सुनाई थी। नियमों के मुताबिक, 2 साल या उससे अधिक की सजा मिलने पर राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता शून्य घोषित की जा चुकी है। विधानसभा सचिवालय द्वारा सीट रिक्त होने की सूचना चुनाव आयोग को भेजने के बाद ही यहां उपचुनाव की सियासी सरगर्मियां तेज हुई थीं।
अधिसूचना ने बदली सियासी हवा
राजनैतिक जानकारों का मानना है कि सीट खाली होने के कारण चुनाव आयोग इस बार की अधिसूचना में दतिया उपचुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है, जिससे भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल अंदरूनी तैयारियों में जुट गए थे। लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई टलने और चुनाव आयोग द्वारा जारी शेड्यूल में मध्य प्रदेश की इस सीट को शामिल न किए जाने से, दतिया सीट पर चुनावी रण सजने के लिए अभी लंबा इंतजार करना होगा।









