Mohan Cabinet Expansion: मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बदलाव की सुगबुगाहत तेज हो गई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की है, जिसे राज्य में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार का ब्लूप्रिंट माना जा रहा है। इससे पहले मुख्यमंत्री ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष से भी भेंट की थी, जिससे साफ है कि नई टीम को लेकर आलाकमान के साथ मंथन अंतिम दौर में है।
नए और अनुभवी बनेंगे मंत्री?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मई और जून के बीच शिवराज सरकार के समय के कुछ चेहरों को हटाया जा सकता है और उनके स्थान पर नए विधायकों को मौका मिल सकता है। कुछ वरिष्ठ मंत्रियों को केंद्र में या संगठन में नई जिम्मेदारी दी जा सकती है। माना जा रहा है कि इस विस्तार में 6 से 7 नए मंत्रियों को शपथ दिलाई जा सकती है। वर्तमान में मोहन सरकार में 4 पद खाली हैं। नियमानुसार कुल मंत्रियों की संख्या 35 तक हो सकती है, जिसे भरने के साथ-साथ पुराने मंत्रियों के प्रदर्शन (फीडबैक) के आधार पर फेरबदल की तैयारी है।
क्षेत्रीय और जातीय संतुलन पर जोर
भाजपा का पूरा फोकस आगामी नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों पर है। इसी रणनीति के तहत मंत्रिमंडल में 'सोशल इंजीनियरिंग' का फॉर्मूला अपनाया जाएगा। बुंदेलखंड, विंध्य और महाकौशल जैसे क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व बढ़ाया जा सकता है। ओबीसी, आदिवासी और अनुसूचित जाति वर्ग के नेताओं को प्रमुखता दी जाएगी ताकि क्षेत्रीय और जातीय संतुलन साधा जा सके।
विजयवर्गीय और सीएम के दौरे के मायने
मुख्यमंत्री से पहले वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी दिल्ली जाकर अमित शाह से मुलाकात की थी। इन सिलसिलेवार मुलाकातों को केवल शिष्टाचार भेंट नहीं माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि मुख्यमंत्री एक तरफ दिल्ली में खाका तैयार कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ अपने मंत्रियों के कामकाज का फीडबैक भी ले रहे हैं।









