MP Rajya Sabha: मध्यप्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों के लिए होने जा रहे चुनावी दंगल से ठीक पहले कांग्रेस खेमे में भारी तनाव और बेचैनी का माहौल है। पूर्व केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी नटराजन को प्रत्याशी बनाए जाने के बाद पार्टी के अंदर पैदा हुए असंतोष को रोकने और विधायकों की नाकेबंदी करने के लिए बीते शनिवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में एक हाई-प्रोफाइल बैठक बुलाई गई थी। लेकिन इस बैठक ने कांग्रेस की चिंताएं और बढ़ा दी हैं। खबर है कि इस बैठनक से पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ समेत पार्टी के 4 बड़े विधायक गायब रहे, जिसके बाद राजनैतिक गलियारों में कांग्रेस की एकजुटता पर सवाल उठने लगे हैं।
बैठक से गायब रहे ये चार माननीय
राज्यसभा चुनाव की रणनीति और वोटिंग ट्रेंड को समझने के लिए बुलाई गई इस बैठक में जब हाजिरी लगी, तो कई कद्दावर चेहरों की कुर्सियां खाली नजर आईं। छिंदवाड़ा के कद्दावर नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ बैठक में मौजूद नहीं थे। हालांकि, विवाद बढ़ता देख संगठन ने सफाई दी कि कमलनाथ दिल्ली से वर्चुअली इस बैठक का हिस्सा बने थे। वही पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बेटे और विधायक जयवर्धन सिंह भी बैठक के शुरुआती दौर से नदारद रहे। बताया गया कि वे किसी निजी कार्य से चेन्नई गए थे। हालांकि वे देर रात भोपाल पहुंचे और मीनाक्षी नटराजन से मुलाकात की। इसके अलावा आदिवासी अंचल के दो अन्य विधायक योगेंद्र सिंह बाबा और वीर सिंह भूरिया भी बैठक में नहीं दिखे। योगेंद्र सिंह के बारे में बताया गया कि वे बीते दो दिन पहले एक सड़क हादसे में घायल हो गए थे, जिस कारण वे बैठक में नही पहुंच सके।
क्यों डरी हुई है कांग्रेस?
राज्यसभा चुनाव के गणित के हिसाब से 230 सदस्यीय विधानसभा में 64 विधायकों के साथ कांग्रेस के पास अपनी इकलौती सीट सुरक्षित रखने का पर्याप्त संख्या बल है। अगर BJP केवल अपने दो अधिकृत प्रत्याशियों तक सीमित रहती, तो तीनों सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन तय था, लेकिन राजनैतिक गलियारों में अफवाह है कि बीजेपी ऐन वक्त पर किसी निर्दलीय या तीसरे चेहरे को बैकअप सपोर्ट देकर मैदान में उतार सकती है। ऐसे में तीसरे उम्मीदवार के लिए क्रॉस वोटिंग की संभावना बन सकती है।
जीतू पटवारी का बड़ा दावा
इन तमाम कयासों और विधायकों की अनुपस्थिति से पैदा हुए विवाद के बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने डैमेज कंट्रोल की कमान संभाल ली है। पार्टी नेताओं का दावा है कि शनिवार की बैठक में सभी अनुपस्थित विधायकों की नही आने की वजहें थीं। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि मीनाक्षी नटराजन के नाम पर सभी 64 विधायकों की सहमति है और यह सीट हर हाल में कांग्रेस के खाते में ही जाएगी।









