चंदेरी - पी.एम. श्री केंद्रीय विद्यालय चंदेरी में कक्षा 8 के छात्र के साथ कथित मानसिक प्रताड़ना और मोबाइल गुम होने की घटना को लेकर की गई शिकायत अब जिला स्तर से आगे मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग के संज्ञान में पहुंच गई है। आयोग ने प्रकरण को बाल अधिकार संरक्षण अधिनियम की धारा 13(1) के अंतर्गत संज्ञान में लेते हुए कलेक्टर अशोकनगर को मामले की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच कर 7 दिवस के भीतर कार्रवाई का प्रतिवेदन आयोग को भेजने के निर्देश दिए हैं।
28 जुलाई की घटना से शुरू हुआ विवाद
आवेदन के अनुसार 28 जुलाई 2026 को विद्यालय की शिक्षिका का मोबाइल विद्यालय परिसर में गुम हो गया था। शिकायतकर्ता अभिभावक आशीष शर्मा का आरोप है कि उनके कक्षा 8 में अध्ययनरत पुत्र शुभ शर्मा पर मोबाइल चोरी किए जाने का संदेह व्यक्त किया गया और पुलिस में शिकायत/सूचना किए जाने के बाद बच्चे से पूछताछ की गई।
अभिभावक के अनुसार बाद में वही मोबाइल विद्यालय की कक्षा 4 में रखा हुआ मिला। शिकायत में इसी तथ्य को आधार बनाते हुए छात्र पर लगाए गए संदेह और उसके बाद की कथित कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। आयोग के पत्र में भी इस घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि मोबाइल कक्षा 4 में मिलने के बाद छात्र पर लगाए गए आरोपों के संबंध में गंभीर प्रश्न उत्पन्न होते हैं।
अभिभावक ने लगाया मानसिक प्रताड़ना का आरोप
शिकायतकर्ता अभिभावक ने विद्यालय की प्राचार्य श्रीमती रूचि वर्मा और शिक्षिका के विरुद्ध छात्र को मानसिक रूप से परेशान किए जाने सहित कई आरोप लगाए हैं। आवेदन में दावा किया गया है कि घटना के बाद छात्र मानसिक रूप से व्यथित हुआ और अभिभावक ने 3 एवं 4 अगस्त को उसे विद्यालय नहीं भेजा।
अभिभावक का यह भी आरोप है कि विद्यालय में शिकायत करने के बाद छात्र के साथ कथित रूप से अलग व्यवहार किया गया और उसे आपत्तिजनक टिप्पणियों का सामना करना पड़ा। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के माध्यम से होना शेष है।
अब कलेक्टर की जांच पर टिकी नजरें
मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने स्वयं प्रकरण को संज्ञान में लेकर जिला कलेक्टर को जांच के निर्देश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट रूप से निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच कर की गई कार्रवाई का प्रतिवेदन 7 दिवस में आयोग को उपलब्ध कराने को कहा है।
ऐसे में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला प्रशासन द्वारा—
मोबाइल गुम होने की घटना और उसके बाद की पूरी कार्रवाई की जांच किस स्तर पर कराई जाती है।
छात्र का नाम पुलिस के समक्ष किस आधार पर संदेह के रूप में सामने आया, इसकी जांच होती है या नहीं।
मोबाइल कक्षा 4 में मिलने के बाद विद्यालय स्तर पर क्या कार्रवाई की गई।
छात्र के साथ कथित व्यवहार एवं मानसिक प्रताड़ना के आरोपों की जांच कैसे की जाती है।
विद्यालय के संबंधित अभिलेख, शिकायतें एवं उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जाती है या नहीं।
तथा आयोग को निर्धारित अवधि में क्या कार्रवाई प्रतिवेदन भेजा जाता है।
वरिष्ठ स्तर पर भी निगरानी की मांग
मामला एक स्कूली छात्र के अधिकारों और उसकी शिक्षा से जुड़ा होने के कारण अभिभावक ने जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच एवं छात्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। वहीं आयोग के पत्र के बाद अब प्रशासनिक जांच की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है।
शिकायत में लगाए गए आरोपों को अभी जांच का विषय माना जाना चाहिए। दोष अथवा जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण सक्षम जांच के बाद ही हो सकेगा।
बाल अधिकार आयोग द्वारा कलेक्टर से सात दिवस में रिपोर्ट मांगे जाने के बाद अब जिला प्रशासन की जांच और उसके निष्कर्ष इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण होंगे। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई और यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं तो वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की जिम्मेदारी भी जांच के माध्यम से तय होगी।
फिलहाल पूरे मामले में निगाहें कलेक्टर अशोकनगर द्वारा कराई जाने वाली जांच और बाल अधिकार संरक्षण आयोग को भेजे जाने वाले कार्रवाई प्रतिवेदन पर टिकी हैं।









