CM Mohan Action: मध्य प्रदेश में प्रशासनिक अधिकारियों और वीआईपी कलचर पर नकेल कसने के लिए मोहन यादव सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। ईंधन और आर्थिक संकट को देखते हुए, राज्य सरकार ने फिजूलखर्ची रोकने के लिए एक नया सर्कुलर लागू कर दिया है। सामान्य प्रशासन विभाग के अवर सचिव सचिंद्र राव द्वारा जारी आदेश के बाद वल्लभ भवन से लेकर जिला स्तर के आला अफसरों में अफरा-तफरी का माहौल है। अब IAS और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के दौरों, होटलों में ठहरने और यात्राओं पर होने वाले खर्च पर बदलाव कर दिया है।
दौरों पर पहरा
भारसाधक सचिव स्तर से नीचे का कोई भी प्रशासनिक अधिकारी अब सरकारी खर्चे पर मध्य प्रदेश की सीमा से बाहर यात्रा नहीं कर सकेगा। इसके लिए उन्हें अपने विभाग के सचिव से अनुमति लेनी होगी। यही नहीं, खुद सचिवों को भी राज्य से बाहर जाने के लिए मुख्य सचिव से मंजूरी लेनी होगी। हर महीने इन बाहरी यात्राओं का पूरा ब्योरा सीएस को सौंपना अनिवार्य कर दिया गया है।
फाइव स्टार कल्चर का अंत
अब सरकारी दौरों के दौरान वरिष्ठ अधिकारी किसी भी निजी या आलीशान होटल में नहीं ठहर सकेंगे। दिल्ली या मुंबई जैसे महानगरों के दौरों पर उन्हें अनिवार्य रूप से आवासीय आयुक्त की मदद लेनी होगी और सरकारी व्यवस्थाओं में ही रुकना होगा।
नो फिजिकल मीटिंग, यस वर्चुअल
जो बैठकें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग या वर्चुअल माध्यम से हो सकती हैं, उनके लिए अब अफसरों को प्रत्यक्ष रूप से जुटने की मनाही रहेगी। इसके अलावा, अफसरों को वाहन पूल को बढ़ावा देने और अनिवार्य रूप से ई-व्हीकल व सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने की हिदायत दी गई है।
मंत्रियों ने घटाया काफिला
इस बड़े फैसले को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील से जोड़कर देखा जा रहा है जिसमें उन्होंने ईंधन संकट को देखते हुए वाहन पूलिंग करने और दौरों से बचने की बात कही थी। इस मुहिम को आगे बढ़ाते हुए मध्य प्रदेश के कई मंत्रियों और विधायकों ने पहले ही अपनी कारों का काफिला कम कर दिया था, और अब इसी कड़ी में सरकारी अफसरों के खर्चों पर भी सरकार ने बड़ी पाबंदी लगा दी है।









