उज्जैन के प्रसिद्ध खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को हटाने को लेकर चल रहे विवाद के बीच मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती से मुलाकात की. सीएम यादव अचानक उमा भारती के भोपाल स्थित निवास पहुंचे. दोनों नेताओं के बीच करीब आधे घंटे तक बंद कमरे में बातचीत हुई.
मुलाकात खत्म होने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव और उमा भारती कुछ देर बाद साथ में बाहर आए. हालांकि, सीएम यादव ने इस दौरान मीडिया से बातचीत नहीं की. उन्होंने मुलाकात को लेकर कोई जानकारी साझा नहीं की और वहां से सीधे रवाना हो गए. ऐसे में दोनों नेताओं के बीच किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसका आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत ब्यौरा सामने नहीं आया है.
उमा भारती ने पहले भी सीएम को लिखा था पत्र
बताया जा रहा है कि उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर से जुड़े विवाद को लेकर उमा भारती पहले ही मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिख चुकी हैं. उन्होंने पत्र के जरिए मंदिर में स्थापित खड़े हनुमान की प्रतिमा को उसके मौजूदा स्थान पर ही रखने की अपील की थी.
उमा भारती ने मंदिर के आसपास होने वाले विकास कार्यों के लिए वैकल्पिक रास्ता निकालने की मांग भी की थी, ताकि विकास कार्य भी हो सकें और मंदिर की प्रतिमा को हटाने की जरूरत भी न पड़े. ऐसे में मुख्यमंत्री के साथ उनकी आज की मुलाकात को इसी विवाद के संदर्भ में भी अहम माना जा रहा है. हालांकि, बैठक में इस मुद्दे पर क्या बातचीत हुई, इसकी पुष्टि दोनों नेताओं की ओर से नहीं की गई है.
उमा भारती ने मुलाकात को बताया भाई-बहन का मिलना
सीएम मोहन यादव के साथ मुलाकात के बाद उमा भारती ने मीडिया से बात की. उन्होंने बताया कि वह काफी समय बाद भोपाल वापस लौटी हैं. उमा भारती के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने उनसे कहा था कि वह खुद उनसे मिलने उनके घर आएंगे.
उमा भारती ने इस मुलाकात को राजनीतिक बैठक के बजाय भाई-बहन के बीच हुई मुलाकात बताया. उन्होंने कहा कि दोनों के बीच इसी भाव के साथ बातचीत हुई.
मंदिर विवाद पर उमा भारती ने उठाए सवाल
उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा हटाए जाने के मुद्दे पर उमा भारती ने अपनी बात दोहराई. उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए.
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर किसी मस्जिद को बचाने के लिए कदम उठाए जा सकते हैं, तो मंदिर को गिराने की स्थिति नहीं होनी चाहिए. उमा भारती का कहना है कि विकास के साथ धार्मिक स्थलों और लोगों की आस्था का भी ध्यान रखा जाना चाहिए.









