Datia By-Election: मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर संभावित होने जा रहे हाई-प्रोफाइल उपचुनाव के लिए कांग्रेस के अंदर उम्मीदवारों के नाम को लेकर खींचतान और मंथन का दौर शुरू हो चुका है। इस बार दतिया का सियासी रण कांग्रेस के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है, यही वजह है कि पार्टी फूंक-फूंक कर कदम रख रही है।
प्लान बी पर काम शुरू
सूत्रों से मिल रही खबर के अनुसार, दतिया के पूर्व विधायक और कद्दावर कांग्रेस नेता राजेंद्र भारती के सामने अचानक कानूनी पेंच आ गए हैं, जिसके कारण उनके स्वयं चुनावी मैदान में उतरने पर सस्पेंस खड़ा हो गया है। इस संकट को देखते हुए कांग्रेस आलाकमान ने दतिया सीट को अपने हाथ से न जाने देने के लिए प्लान-बी पर काम करना शुरू कर दिया है।
राहुल से दिल्ली दरबार में मुलाकात
राजेंद्र भारती के खुद चुनाव न लड़ पाने की स्थिति को देखते हुए दतिया में भारती परिवार के राजनैतिक वजूद और विरासत को बचाए रखने की कवायद तेज हो गई है। पिछले दिनों पूर्व विधायक राजेंद्र भारती ने अपने बेटों के साथ दिल्ली का रुख किया था। वहां उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। इस रणनीतिक बैठक के बाद से ही दतिया के राजनैतिक गलियारों में यह कयास बेहद तेज हैं कि आलाकमान भारती परिवार के ही किसी युवा चेहरे को मैदान में उतारकर सहानुभूति और युवा कार्ड एक साथ खेल सकता है।
कांग्रेस के रडार पर 3 बड़े चेहरे
अंकित भारती / अर्जुन भारती : दोनों पूर्व विधायक राजेंद्र भारती के पुत्र हैं। भारती परिवार की दतिया में मजबूत जमीन है और इन युवा चेहरों की नई उम्र के मतदाताओं के बीच काफी अच्छी सक्रियता देखी जा रही है।
अवधेश नायक: अवधेश नायक दतिया के स्थानीय जमीनी नेता हैं, जिनकी संगठन और स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच गहरी पैठ मानी जाती है। वे भी टिकट की रेस में पूरी मजबूती से डटे हुए हैं।
दामोदर यादव : इस पूरे राजनैतिक घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाला मोड़ दामोदर यादव का नाम सामने आना है। हालांकि, दामोदर यादव इस समय कांग्रेस पार्टी का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस के कुछ बड़े नेता गुपचुप तरीके से दामोदर यादव से लगातार संपर्क साध रहे हैं, ताकि ऐन वक्त पर उन्हें पार्टी में शामिल कराकर बड़ा दांव खेला जा सके।
प्रतिष्ठा की जंग बनी दतिया सीट
ग्वालियर-चंबल की राजनीति को समझने वाले जानकारों की माने तो कांग्रेस इस उपचुनाव को अपनी नाक का सवाल मानकर चल रही है। भारती परिवार की साख और क्षेत्र के जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखकर ही दिल्ली और भोपाल स्तर पर नाम फाइनल किया जा रहा है। माना जा रहा है कि डैमेज कंट्रोल और भितरघात से बचने के लिए कांग्रेस जल्द ही अपने प्रत्याशी के नाम की घोषणा कर सबको चौंका सकती है।









