डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/ डिंडौरी जिले में MP पुलिस विभाग ने अनुशासनात्मक और नैतिक आधार पर एक नजीर पेश करने वाली कार्रवाई की है। कानून और सामाजिक मर्यादाओं का उल्लंघन करने के आरोप में विभागीय जांच का सामना कर रहे आरक्षक रोहन सिंह मरावी को पुलिस अधीक्षक (SP) डिंडौरी द्वारा शासकीय सेवा से बर्खास्त करने का दंडादेश जारी किया
गया है।
क्या है पूरा मामला
आरक्षक ने अपनी प्रथम कानूनी पत्नी सावित्री बाई से विधिवत और वैधानिक रूप से तलाक लिए बिना ही पार्वती बाई नामक महिला के साथ संबंध स्थापित किए और उनके साथ पति-पत्नी की तरह जीवन व्यतीत करना शुरू कर दिया।
जांच में सामने आए अहम साक्ष्य
विभागीय जांच अधिकारी द्वारा मामले की गहन छानबीन की गई, जिसमें कई शासकीय और व्यक्तिगत दस्तावेजों को साक्ष्य के रूप में शामिल किया गया।
समग्र आईडी, परिवार आईडी, बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र और शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच से यह स्पष्ट रूप से प्रमाणित हुआ कि आरक्षक और पार्वती बाई के संबंध से दो बच्चों (एक पुत्र और एक पुत्री) का जन्म हुआ है।
तलाक का कोई वैधानिक आधार नहीं:
आरक्षक ने अपने बचाव में यह तर्क दिया था कि उनकी पहली पत्नी सावित्री बाई से उनका लंबे समय से पारिवारिक विवाद चल रहा है और वे दोनों अलग-अलग रह रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वे अदालत के आदेशानुसार भरण-पोषण की राशि का नियमित भुगतान कर रहे हैं।
जांच का निष्कर्ष:
जांच अधिकारी ने स्पष्ट किया कि अलग रहने या भरण-पोषण देने मात्र से कानूनी विवाह समाप्त नहीं होता। कोर्ट से विधिवत तलाक का कोई भी वैधानिक दस्तावेज प्रस्तुत न किए जाने के कारण दोनों आरोपों को पूरी तरह प्रमाणित माना गया।
विभाग की छवि धूमिल करने का गंभीर आरोप
आरक्षक पर दूसरा सबसे बड़ा आरोप यह था कि उनके इस गैर-कानूनी और अनैतिक आचरण से आम जनता के बीच पुलिस प्रशासन की साख और छवि पर गहरा विपरीत प्रभाव पड़ा है। विभागीय जांच में कहा गया कि अनुशासित बल का हिस्सा रहते हुए कानून का उल्लंघन करना और बिना तलाक दूसरी महिला के साथ रहना सेवा आचरण नियमों के सर्वथा विपरीत है।
299 दिनों का निलंबन और अंतिम कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए आरक्षक रोहन सिंह मरावी को विभागीय जांच के दौरान निलंबित कर दिया गया था।निलंबन की अवधि: आरक्षक 27 मार्च 2025 से 10 जनवरी 2026 तक कुल 299 दिन निलंबित रहे।
अंतिम दंडादेश: विभागीय जांच में दोनों प्राथमिक आरोप सेवा नियमों का उल्लंघन और विभाग की छवि धूमिल करना, सिद्ध होने के बाद पुलिस अधीक्षक डिंडौरी ने कड़ा रुख अपनाते हुए आरक्षक को तत्काल प्रभाव से “सेवा से पृथक” करने का आदेश जारी कर दिया। इसके साथ ही आदेश में उनके 299 दिनों के निलंबन काल को "निलंबन" में ही व्यतीत माना गया है।









