डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/ डिंडोरी, विकास के दावों के बीच मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने सरकारी तंत्र और निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। जिले के रामगुड़ा क्षेत्र में प्रधानमंत्री जनमन ग्राम सड़क योजना के तहत बनाई जा रही सड़क विवादों के भंवर में फंस गई है। ग्रामीणों ने न केवल निर्माण में धांधली के आरोप लगाए हैं, बल्कि ठेकेदार पर डराने-धमकाने का भी संगीन आरोप मढ़ा है।
रामगुड़ा ग्राम पंचायत के अंतर्गत रामगुड़ा से दुनिया बघाढ़ तक बनाई जा रही यह सड़क लगभग 10 किलोमीटर लंबी है। इस परियोजना के लिए सरकार ने 6.30 करोड़ रुपये से अधिक का बजट आवंटित किया है। सड़क का निर्माण कार्य अक्टूबर 2024 से शुरू हुआ था, जिसे लेकर क्षेत्र के लोगों में काफी उत्साह था। लेकिन जैसे-जैसे काम आगे बढ़ रहा है, ग्रामीणों की खुशी अब जनआक्रोश में बदल गई है।ग्रामीणों द्वारा आरोप लगाया गया है कि सड़क निर्माण में प्रयुक्त होने वाला मसाला (मैटेरियल) मानकों के विपरीत और बेहद पतला है। सड़क की मोटाई उतनी नहीं रखी जा रही है जितनी सरकारी दस्तावेजों और एस्टीमेट में दर्ज है।

सड़क के किनारे बनाए जा रहे 'शोल्डर' का काम इतना कच्चा है कि लोगों को डर है कि पहली मानसूनी बारिश में ही करोड़ों की यह सड़क बह जाएगी। सड़क की खराब हालत देखकर जब स्थानीय लोगों ने ठेकेदार और काम देख रहे कर्मचारियों से शिकायत की, तो आरोप है कि उन्हें सुधार करने के बजाय धमकाया गया। ग्रामीणों का कहना है कि जब वे अपने हक और गांव के विकास की बात करते हैं, तो उन्हें डराकर चुप कराने की कोशिश की जाती है। इस व्यवहार से क्षेत्र में भारी नाराजगी और आक्रोश का माहौल व्याप्त है।
ग्रामीणों ने अब शासन और जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। उनका तर्क है कि यह केवल एक सड़क का मामला नहीं है, बल्कि जनता की गाढ़ी कमाई और सरकारी खजाने की खुली लूट है। यदि समय रहते गुणवत्ता की जांच नहीं हुई, तो करोड़ों रुपये बर्बाद हो जाएंगे और क्षेत्र की जनता के हाथ फिर वही टूटी-फूटी राहें रह जाएंगी।

प्रधानमंत्री जनमन योजना का मुख्य उद्देश्य पिछड़े क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना है। लेकिन डिंडोरी का यह मामला बताता है कि कैसे धरातल पर ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत से योजनाओं को पलीता लगाया जा रहा है। अब देखना यह होगा कि क्या डिंडोरी कलेक्टर और संबंधित विभाग इस पर संज्ञान लेते हैं या फिर यह मामला भी पुरानी फाइलों की तरह दबा दिया जाएगा। फिलहाल, ग्रामीण इस मुद्दे पर डटे हुए हैं और विकास के नाम पर हो रहे इस 'खिलवाड़' को रोकने की मांग कर रहे हैं।









