दतिया। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव अब सिर्फ बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला नहीं रह गया है। कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने के बाद वरिष्ठ नेता अवधेश नायक अचानक पूरे चुनाव के केंद्र में आ गए हैं। दोनों प्रमुख दल उन्हें अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं।
टिकट कटते ही बढ़ी हलचल
कांग्रेस ने दतिया उपचुनाव के लिए घनश्याम सिंह को उम्मीदवार बनाया। इसके बाद अवधेश नायक और उनके समर्थकों की नाराजगी खुलकर सामने आ गई। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस फैसले से चुनावी समीकरण बदल सकते हैं।
टिकट विवाद के बीच मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री राकेश शुक्ला अवधेश नायक के घर पहुंचे। इससे पहले बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी भी उनसे मुलाकात कर चुके हैं। इन बैठकों के बाद उनके बीजेपी में लौटने की चर्चा तेज हो गई है, हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
कांग्रेस भी डैमेज कंट्रोल में
अवधेश नायक की नाराजगी को देखते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी खुद उनके निवास पहुंचे और लंबी बातचीत की। कांग्रेस की कोशिश है कि नायक और उनके समर्थकों को मनाकर चुनावी नुकसान से बचा जा सके।
वादाखिलाफी का आरोप
मीडिया से बातचीत में अवधेश नायक ने कांग्रेस नेतृत्व पर वादा तोड़ने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि 2023 विधानसभा चुनाव में टिकट कटने के बाद तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ और पार्टी प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि अगला दतिया चुनाव वही लड़ेंगे।
नायक का कहना है कि दूसरी बार टिकट नहीं मिलने से वे और उनके समर्थक खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
कौन हैं अवधेश नायक?
अवधेश नायक ने अपनी राजनीतिक शुरुआत बीजेपी से की थी। वे 1993 में पार्टी की सक्रिय राजनीति में आए और दतिया नगर पालिका में पार्षद भी रहे। बीजेपी के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ने के बाद उन्होंने 2023 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस जॉइन कर ली थी।
शुरुआत में कांग्रेस ने उन्हें उम्मीदवार घोषित किया था, लेकिन बाद में टिकट बदलकर राजेंद्र भारती को दे दिया गया। अब 2026 के उपचुनाव में भी टिकट नहीं मिलने से उनकी नाराजगी बढ़ गई है।
क्यों अहम हैं अवधेश नायक?
दतिया में अवधेश नायक की व्यक्तिगत पकड़ और मजबूत संगठनात्मक नेटवर्क माना जाता है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार ब्राह्मण और ठाकुर मतदाताओं के बीच उनका प्रभाव दोनों दलों के लिए महत्वपूर्ण है।
यदि वे कांग्रेस के साथ बने रहते हैं, बीजेपी में लौटते हैं या कोई अलग राजनीतिक फैसला लेते हैं, तो इसका सीधा असर उपचुनाव के नतीजों पर पड़ सकता है।
अब सबकी नजर अगले फैसले पर
फिलहाल दतिया की राजनीति का सबसे बड़ा सवाल यही है कि अवधेश नायक आखिर किसके साथ जाएंगे। बीजेपी और कांग्रेस दोनों उन्हें अपने पाले में रखने की कोशिश कर रही हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में उनका फैसला दतिया उपचुनाव का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हो सकता है।
ये खबर भी पढ़ें..









