पूर्व मुख्यमंत्री ने राजेंद्र भारती मामले को लेकर भाजपा सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि पूरी कार्रवाई राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित दिखाई देती है और बिना ठोस तथ्यों के जल्दबाजी में कदम उठाए गए. उनके मुताबिक इस मामले को जानबूझकर विवाद का रूप दिया गया ताकि विपक्षी आवाजों को दबाया जा सके.
दिग्विजय सिंह का बड़ा बयान
दिग्विजय सिंह ने बताया कि राजेंद्र भारती की मां एक एनजीओ चलाती थीं और मामला केवल एफडी रिन्यू कराने से जुड़ा था. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने इसे जबरन लोन विवाद बनाकर पेश किया, जबकि बैंक को किसी भी तरह का आर्थिक नुकसान नहीं पहुंचा था. इसके बावजूद देर रात तत्काल आदेश जारी किए गए, जिससे कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि पूरे घटनाक्रम से साफ लगता है कि यह कदम निष्पक्ष जांच के बजाय राजनीतिक उद्देश्य से उठाया गया.
इनकी भूमिका पर उठाये सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष ["राजनेता","नरेंद्र सिंह तोमर","मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष"] की भूमिका पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि बीना से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे लगातार भाजपा नेताओं के साथ सार्वजनिक मंच साझा कर रही हैं, लेकिन दलबदल कानून के तहत अब तक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई. दिग्विजय सिंह का कहना है कि इस तरह का रवैया लोकतांत्रिक मूल्यों और निष्पक्ष व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है.
मुकेश मल्होत्रा के मामले का भी किया जिक्र
उन्होंने आदिवासी नेता मुकेश मल्होत्रा के मामले का भी जिक्र किया और उच्च न्यायालय के फैसले पर आश्चर्य जताया. उनका कहना था कि किसी आदिवासी नेता को परेशान कर हारे हुए उम्मीदवार को विजेता घोषित करना लोकतंत्र के लिए चिंताजनक संकेत है. दिग्विजय सिंह के इन बयानों के बाद प्रदेश की राजनीति में नया विवाद शुरू हो गया है. कांग्रेस ने इसे विपक्ष की आवाज दबाने और लोकतांत्रिक संस्थाओं के दुरुपयोग का मामला बताया है.
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