भोपाल। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट के उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। यह फैसला राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि डॉ. मिश्रा लंबे समय तक दतिया की राजनीति का बड़ा चेहरा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर बीजेपी ने नया चेहरा क्यों चुना।
संगठन के नेता पर जताया भरोसा
आशुतोष तिवारी लंबे समय से बीजेपी संगठन और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे हैं। वे भोपाल और ग्वालियर संभाग के संगठन मंत्री रह चुके हैं। साल 2020 में उन्हें मध्य प्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल का अध्यक्ष बनाया गया था, जहां उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी मिला था।
पार्टी के भीतर उन्हें संगठन को मजबूत करने वाले और पर्दे के पीछे काम करने वाले नेताओं में माना जाता है। माना जा रहा है कि संगठन में उनके लंबे अनुभव और सक्रिय भूमिका को देखते हुए पार्टी ने उन्हें चुनावी मैदान में उतारने का फैसला किया।
नए चेहरे पर दांव लगाने की रणनीति
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी इस उपचुनाव में नया चेहरा सामने लाकर स्थानीय संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच नया संदेश देना चाहती है। आशुतोष तिवारी दतिया जिले की भांडेर तहसील के पिपरौआ कलां गांव के निवासी हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर भी उनकी पहचान है।
साथ ही, पार्टी संगठन से जुड़े नेता होने के कारण उनके पास कार्यकर्ताओं के साथ बेहतर समन्वय का अनुभव भी है। इसे भी टिकट देने की एक वजह माना जा रहा है।
डॉ. नरोत्तम मिश्रा को टिकट क्यों नहीं मिला?
भारतीय जनता पार्टी ने डॉ. नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं देने को लेकर कोई एक वजह साफ नहीं है। इसलिए यह कहना कि उन्हें किसी विशेष वजह से टिकट नहीं मिला, तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।
हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी इस उपचुनाव में नई रणनीति के तहत अलग उम्मीदवार के साथ चुनाव लड़ना चाहती थी। इसके अलावा स्थानीय समीकरण, संगठन की रणनीति और चुनावी गणित जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखकर यह निर्णय लिया गया है।
क्या डॉ. मिश्रा की भूमिका खत्म हो गई?
ऐसा मानना उचित नहीं होगा कि टिकट नहीं मिलने का मतलब डॉ. नरोत्तम मिश्रा की राजनीतिक भूमिका समाप्त हो गई है। बीजेपी में कई सीनियर नेताओं की भूमिका केवल चुनाव लड़ने तक सीमित नहीं होती। चुनाव प्रचार, संगठन और रणनीति में भी उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी हो सकती है। दतिया उपचुनाव में भी उनके सक्रिय रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल क्या साफ है?
फिलहाल आधिकारिक रूप से केवल इतना तय है कि बीजेपी ने दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। वहीं, डॉ. नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिया गया है। इसके पीछे की वजहों पर राजनीतिक चर्चाएं जरूर हैं,
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