भारतीय जनता पार्टी अपने चुनावी फैसलों से अक्सर राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ देती है. दतिया विधानसभा उपचुनाव में भी पार्टी ने कुछ ऐसा ही किया. जहां पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा था, वहीं अंतिम समय में भाजपा ने आशुतोष तिवारी के नाम पर मुहर लगाकर सभी राजनीतिक कयासों को गलत साबित कर दिया. टिकट की घोषणा के बाद दतिया की सियासत में हलचल और तेज हो गई है.
नरोत्तम मिश्रा को लेकर थीं मजबूत संभावनाएं
उपचुनाव की घोषणा के बाद से डॉ. नरोत्तम मिश्रा लगातार क्षेत्र में सक्रिय नजर आ रहे थे. वे कार्यकर्ताओं से लगातार मुलाकात कर रहे थे और लोगों के बीच जाकर जनसंपर्क अभियान चला रहे थे. बताया जाता है कि 8 जुलाई को उनके बेटे ने नामांकन पत्र भी खरीद लिया था, जिससे यह माना जा रहा था कि पार्टी जल्द ही उनके नाम की घोषणा करेगी. इतना ही नहीं, उन्होंने सार्वजनिक तौर पर यह भी कहना शुरू कर दिया था कि पिछली कमियों से सीख लेकर इस बार जनता की अपेक्षाओं के अनुसार काम किया जाएगा.
आशुतोष तिवारी पर जताया गया भरोसा
भाजपा ने आखिरकार आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार घोषित कर नया राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है. आशुतोष तिवारी लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा संगठन से जुड़े रहे हैं. उन्हें संघ के प्रचारक के रूप में भी पहचान मिली है. संगठनात्मक कार्यों में उनकी सक्रिय भूमिका और युवाओं के बीच मजबूत पकड़ को उनकी सबसे बड़ी ताकत माना जाता है. उनकी साफ-सुथरी राजनीतिक छवि भी पार्टी के फैसले में अहम कारण मानी जा रही है.
संगठन में निभा चुके हैं कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां
आशुतोष तिवारी दतिया जिले की भांडेर तहसील के पिपरउआ गांव के रहने वाले हैं. उन्होंने ग्राम भारती के जिला अध्यक्ष के रूप में संगठन को मजबूत करने का काम किया और बाद में संभाग स्तर पर भी कई जिम्मेदारियां संभालीं. वर्ष 2020 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में उन्हें मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था. वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने सेवढ़ा सीट से टिकट की दावेदारी भी की थी, लेकिन उस समय पार्टी ने किसी अन्य उम्मीदवार को मौका दिया था.
जातीय समीकरण और संगठनात्मक अनुभव पर दांव
दतिया विधानसभा क्षेत्र को ब्राह्मण बहुल सीट माना जाता है. ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने स्थानीय सामाजिक समीकरणों और संगठन में लंबे अनुभव को ध्यान में रखते हुए आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है. अब पार्टी उन्हें मैदान में उतारकर उपचुनाव में जीत की रणनीति पर काम कर रही है. दूसरी ओर नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने से समर्थकों में भी चर्चा तेज हो गई है. अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि भाजपा का यह नया दांव चुनावी नतीजों में कितना असर दिखाता है.









