देवास/पवन उपाध्याय/खबर डिजिटल/ एक तरफ जहां केंद्र और राज्य सरकारें 'स्वच्छ भारत अभियान' को सफल बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही हैं, वहीं ग्राम गन्धर्वपुरी में सरकारी तंत्र की घोर लापरवाही के कारण अभियान की धज्जियां उड़ती दिखाई दे रही हैं। यहां के स्कूल के ठीक सामने कीचड़ और गंदगी का विशाल अंबार लगा हुआ है, जिसने न केवल स्कूली बच्चों, बल्कि शिक्षकों और ग्रामीणों का जीवन भी मुश्किल कर दिया है।
स्कूल की राह बनी दलदल
स्कूल के मुख्य द्वार के सामने जमा यह गंदगी और कीचड़ एक बड़ा खतरा बन चुकी है। अभिभावकों ने बताया कि रोजाना छात्र-छात्राओं को इसी फिसलन भरे रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है। बारिश के बाद स्थिति और भी बदतर हो जाती है।
बच्चों के गिरने का डर
कीचड़ के कारण बच्चे अक्सर फिसलकर गिर जाते हैं, जिससे उन्हें चोट लगने का खतरा बना रहता है। छोटे बच्चों के लिए यह रास्ता किसी दलदल से कम नहीं है। साथ ही बीमारियों का खतरा भी बना हुआ है, क्योंकि गंदगी के इस ढेर में मच्छर और कीड़े पनप रहे हैं, जिससे बच्चों में संक्रमण और जलजनित बीमारियों के फैलने का गंभीर अंदेशा बना हुआ है।
शिक्षा में बाधा
गंदे कपड़े और शारीरिक चोट के डर से कई बच्चे नियमित रूप से स्कूल आने से कतराने लगे हैं, जिससे उनकी शिक्षा बाधित हो रही है। सरपंच-सचिव को कई आवेदन दिए, लेकिन फिर भी अनदेखी की जा रही है। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि इस गंभीर समस्या को लेकर वे कई बार ग्राम सरपंच और सचिव को लिखित आवेदन दे चुके हैं। समस्या के समाधान के लिए बार-बार गुहार लगाने के बावजूद, प्रशासन के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। हर बार सिर्फ खोखले आश्वासन दिए गए, लेकिन मौके पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
एक चिंतित अभिभावक
अभिभावकों का कहना है कि "हम अपने बच्चों को रोज डरते-डरते स्कूल भेजते हैं। कई बार कीचड़ में गिरने से उनकी किताबें और कपड़े गंदे हो जाते हैं। सरपंच-सचिव सिर्फ आश्वासन देते हैं, लेकिन समस्या वहीं की वहीं है।"
प्रशासन से सवाल, कब जागेगा ज़िम्मेदार तंत्र?
गन्धर्वपुरी के निवासियों ने जिला प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि अगर जल्द ही स्कूल के सामने से कीचड़ और गंदगी को हटाकर रास्ते को दुरुस्त नहीं किया गया, तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। सवाल यह उठता है कि क्या सरकारी योजनाओं का लाभ दूर-दराज के गांवों तक नहीं पहुंच रहा है? क्या बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ी इतनी गंभीर समस्या पर भी स्थानीय जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौन साधकर बैठे रहेंगे? जिला कलेक्टर और संबंधित विभागों को इस मामले का संज्ञान लेकर जल्द से जल्द कार्रवाई करनी चाहिए ताकि नौनिहालों का भविष्य सुरक्षित हो सके।









