भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेन्द्र शास्त्री ने ताजा बयान दिया है कि स्कूलों में रामायण पढाई जाना चाहिए, क्योंकि ये रामायण संविधान तुल्य है। इसके पहले भी उन्होंने स्कूलों में रामायण (रामचरितमानस) पढ़ाए जाने की पुरजोर वकालत की है। अपने बयानों में उन्होंने रामायण को भारत के सांस्कृतिक मूल्यों का आधार बताते हुए इसकी तुलना देश के सर्वोच्च नियमों से की थी। धीरेंद्र शास्त्री अक्सर तर्क देते हैं कि भारतीय संविधान की मूल प्रति (Original Copy) के तीसरे भाग (मौलिक अधिकार) पर लंका विजय के बाद अयोध्या लौटते भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण जी का चित्र अंकित है। उनका कहना है कि जब संविधान निर्माताओं ने राम को आदर्श माना, तो रामायण का ज्ञान भी जरूरी है।
सपा नेता ने दिया करारा जवाब
पंडित धीरेन्द्र शास्त्री के जवाब में मध्यप्रदेश के समाजवादी पार्टी के नेता पीरज़ादा तौकी़र निजा़मी ने कहा कि उनके बयान का स्वागत है, उनका कहना है कि रामायण को पूरे स्कूलों में पढ़ाना चाहिए, वो संविधान तुल्य है। उनका कहना है कि गुरुग्रंथ साहिब, बाइबिल या कुरान शरीफ हो, ये सारे संविधान तुल्य ग्रंथ है। सारे देश में सरकारें तो आपकी है, आप उनसे कहिये। सारे धर्मों के ग्रंथ स्कूलों में पढ़ाया जाना चाहिए।
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निशाने पर संघ और भाजपा
सपा नेता पीरज़ादा तौकी़र निजा़मी का कहना है कि देशभर में संघ और भाजपा के लोग नफरत फैला रहे हैं, ऐसे में सारे धर्मों के ग्रंथ स्कूलों में पढ़ाए जाएंगे, तो बच्चा सारे धर्मों का ज्ञान लेकर स्कूल से निकलेगा। मनुष्य बनकर निकलेगा, इंसानियत का पाठ पढ़ाएगा, ऐसा जरुर होना चाहिए, ये स्वागत योग्य है, सभी धर्मों का ज्ञान देने स्कूलों में दिया जाना चाहिए, इससे कोई परहेज नहीं करना चाहिए।
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